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Mandi News: एक साल कैद और 5.50 लाख मुआवजा राशि की सजा बरकरार
Thu, 09 Oct 2025 05:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 09 Oct 2025 05:58 AM IST
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मंडी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुंदरनगर (अपीलीय अदालत) की अदालत ने चेक बाउंस मामले में अपील को खारिज कर दिया। अपीलीय अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
मामले के तथ्यों के अनुसार यह मामला वर्ष 2018 का है। सुरेंद्र कुमार (शिकायतकर्ता) निवासी ग्राम जरोल तहसील सुंदरनगर ने रमेश चंद निवासी लालहानू जिला सोलन से पांच लाख रुपये की उधारी वसूली के लिए चेक प्राप्त किया था।
यह चेक पंजाब नेशनल बैंक शाखा पिपलूघाट सोलन का था। जब शिकायतकर्ता ने चेक को पीएनबी शाखा जरोल में जमा किया तो बैंक ने 25 सितंबर 2018 को अपर्याप्त धनराशि का मेमो जारी करते हुए चेक अस्वीकार कर दिया।
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इसके बाद सुरेंद्र कुमार ने 29 सितंबर 2018 को कानूनी नोटिस भेजा परंतु आरोपी ने न तो नोटिस का जवाब दिया और न ही रकम चुकाई। परिणामस्वरूप एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत मामला दायर किया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुंदरनगर ने 2 अप्रैल 2024 को रमेश चंद को दोषी ठहराया और एक वर्ष के कारावास की सजा के साथ 5.50 लाख मुआवजा राशि देने का आदेश दिया।
निचली अदालत से करार दोषी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की और यह दलील दी कि चेक खाली दिया गया था तथा शिकायतकर्ता ने उसमें राशि भरकर दुरुपयोग किया। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति हस्ताक्षरित खाली चेक देता है तो वह प्राप्तकर्ता को उसे पूरा भरने का वैध अधिकार देता है।
ऐसे में जारीकर्ता देनदारी से मुक्त नहीं हो सकता। अदालत ने अपील खारिज करते हुए निचली अदालत का निर्णय बरकरार रखा।
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मामले के तथ्यों के अनुसार यह मामला वर्ष 2018 का है। सुरेंद्र कुमार (शिकायतकर्ता) निवासी ग्राम जरोल तहसील सुंदरनगर ने रमेश चंद निवासी लालहानू जिला सोलन से पांच लाख रुपये की उधारी वसूली के लिए चेक प्राप्त किया था।
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यह चेक पंजाब नेशनल बैंक शाखा पिपलूघाट सोलन का था। जब शिकायतकर्ता ने चेक को पीएनबी शाखा जरोल में जमा किया तो बैंक ने 25 सितंबर 2018 को अपर्याप्त धनराशि का मेमो जारी करते हुए चेक अस्वीकार कर दिया।
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इसके बाद सुरेंद्र कुमार ने 29 सितंबर 2018 को कानूनी नोटिस भेजा परंतु आरोपी ने न तो नोटिस का जवाब दिया और न ही रकम चुकाई। परिणामस्वरूप एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत मामला दायर किया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुंदरनगर ने 2 अप्रैल 2024 को रमेश चंद को दोषी ठहराया और एक वर्ष के कारावास की सजा के साथ 5.50 लाख मुआवजा राशि देने का आदेश दिया।
निचली अदालत से करार दोषी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की और यह दलील दी कि चेक खाली दिया गया था तथा शिकायतकर्ता ने उसमें राशि भरकर दुरुपयोग किया। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति हस्ताक्षरित खाली चेक देता है तो वह प्राप्तकर्ता को उसे पूरा भरने का वैध अधिकार देता है।
ऐसे में जारीकर्ता देनदारी से मुक्त नहीं हो सकता। अदालत ने अपील खारिज करते हुए निचली अदालत का निर्णय बरकरार रखा।