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Mandi News: बच्चे की अभिरक्षा मां को, पिता को महीने में एक बार मिलने का अधिकार
Sat, 09 May 2026 12:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sat, 09 May 2026 12:59 AM IST
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सुंदरनगर परिवार न्यायालय ने तीन वर्षीय बच्चे को मां के हवाले करने के दिए आदेश
मंडी। सुंदरनगर स्थित परिवार न्यायालय ने तीन वर्षीय बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंपने के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि कम उम्र के बच्चे के बेहतर मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए मां का साथ अधिक उपयुक्त है। अदालत ने बच्चे के हित को सर्वोपरि मानते हुए यह निर्णय सुनाया।
मामले के अनुसार, महिला ने अदालत में याचिका दायर कर बताया कि उसकी शादी वर्ष 2018 में बल्ह निवासी से हुई थी और मई 2022 में एक बेटे का जन्म हुआ। तलाक के बाद बच्चा मां के पास रह रहा था, लेकिन जुलाई 2025 में पिता उसे अपने साथ ले गए और मां को मिलने से रोका गया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक उद्योग में कार्यरत है और बच्चे की देखभाल करने में सक्षम है। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर पाया कि बच्चा पांच वर्ष से कम आयु का है, ऐसे में उसकी अभिरक्षा सामान्यतः मां को दी जानी चाहिए।
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अदालत ने बच्चे की अभिरक्षा तत्काल मां को सौंपने और पिता को महीने में एक बार मिलने का अधिकार देने के आदेश दिए, ताकि बच्चे का दोनों अभिभावकों से भावनात्मक जुड़ाव बना रहे।
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मंडी। सुंदरनगर स्थित परिवार न्यायालय ने तीन वर्षीय बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंपने के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि कम उम्र के बच्चे के बेहतर मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए मां का साथ अधिक उपयुक्त है। अदालत ने बच्चे के हित को सर्वोपरि मानते हुए यह निर्णय सुनाया।
मामले के अनुसार, महिला ने अदालत में याचिका दायर कर बताया कि उसकी शादी वर्ष 2018 में बल्ह निवासी से हुई थी और मई 2022 में एक बेटे का जन्म हुआ। तलाक के बाद बच्चा मां के पास रह रहा था, लेकिन जुलाई 2025 में पिता उसे अपने साथ ले गए और मां को मिलने से रोका गया।
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याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक उद्योग में कार्यरत है और बच्चे की देखभाल करने में सक्षम है। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर पाया कि बच्चा पांच वर्ष से कम आयु का है, ऐसे में उसकी अभिरक्षा सामान्यतः मां को दी जानी चाहिए।
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अदालत ने बच्चे की अभिरक्षा तत्काल मां को सौंपने और पिता को महीने में एक बार मिलने का अधिकार देने के आदेश दिए, ताकि बच्चे का दोनों अभिभावकों से भावनात्मक जुड़ाव बना रहे।