{"_id":"67e59af6c34de1e6e607fbf3","slug":"the-doors-of-bada-dev-kamrunag-temple-will-open-tomorrow-mandi-news-c-90-1-ssml1045-151700-2025-03-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: कल खुलेंगे बड़ा देव कमरुनाग मंदिर के कपाट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: कल खुलेंगे बड़ा देव कमरुनाग मंदिर के कपाट
Fri, 28 Mar 2025 12:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Fri, 28 Mar 2025 12:07 AM IST
विज्ञापन
बड़ा देव कमरुनाग मंदिर और पवित्र झील। संवाद
गोहर (मंडी)। मंडी जनपद के सबसे बड़े देवता कमरुनाग के मंदिर के कपाट आगामी 29 मार्च को भक्तों के दर्शनार्थ खुलने जा रहे हैं।
सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह मंदिर करीब चार माह तक बंद रहता है, लेकिन अब भक्तगण देवता के दर्शन कर सकेंगे। देव कमरुनाग मंडी अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव और मेहमाननवाजी निपटाकर अपने निवास मरहयार पहुंच गए हैं। कमरुनाग को ‘बड़ा देव’ भी कहा जाता है।
देवता का मंदिर समुद्र तल से करीब 3,334 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कमरुनाग झील के समीप स्थित इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। हर साल नवंबर माह में भारी बर्फबारी के चलते मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवता को विशेष पूजा-अर्चना के बाद शीतकालीन विश्राम के लिए भेज दिया जाता है। इस दौरान मंदिर क्षेत्र में कोई नहीं जा सकता।
अब चार महीने बाद परंपराओं के अनुसार विशेष अनुष्ठान के साथ 29 मार्च को मंदिर के द्वार फिर से खोले जाएंगे। कपाट खुलने के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मंदिर में देवता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह मंदिर करीब चार माह तक बंद रहता है, लेकिन अब भक्तगण देवता के दर्शन कर सकेंगे। देव कमरुनाग मंडी अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव और मेहमाननवाजी निपटाकर अपने निवास मरहयार पहुंच गए हैं। कमरुनाग को ‘बड़ा देव’ भी कहा जाता है।
देवता का मंदिर समुद्र तल से करीब 3,334 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कमरुनाग झील के समीप स्थित इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। हर साल नवंबर माह में भारी बर्फबारी के चलते मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवता को विशेष पूजा-अर्चना के बाद शीतकालीन विश्राम के लिए भेज दिया जाता है। इस दौरान मंदिर क्षेत्र में कोई नहीं जा सकता।
विज्ञापन
अब चार महीने बाद परंपराओं के अनुसार विशेष अनुष्ठान के साथ 29 मार्च को मंदिर के द्वार फिर से खोले जाएंगे। कपाट खुलने के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मंदिर में देवता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
विज्ञापन