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Mandi News: हास्य किताब लाड़ी री झणांग हंसाएगी और स्वामी कृष्णानंद की कहानी देगी प्रेरणा
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एसपीयू में मंडी हास्य कविता संग्रह और किताब का विमोचन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरदार पटेल विश्वविद्यालय में शनिवार को मंडी से जुड़ी दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन कुलपति प्रोफेसर ललित कुमार अवस्थी की ओर से किया गया।
पहली पुस्तक मंडयाली हास्य कविता संग्रह है, जिसे विनोद बहल ने लिखा है। उन्होंने बताया कि पुस्तक का शीर्षक लाड़ी री झणांग.. है, जिसका अर्थ पत्नी की लताड़ या डांट होता है। इस संग्रह में कुल 55 हास्य कविताएं शामिल हैं, जिनमें पत्नी की डांट से लेकर जन्म से मृत्यु तक के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का रोचक वर्णन किया गया है। सभी कविताएं मंडयाली बोली में लिखी गई हैं, लेकिन पाठकों की सुविधा के लिए उनका हिंदी अनुवाद भी साथ में दिया गया है।
दूसरी पुस्तक वीर स्वतंत्रता सेनानी स्वामी कृष्णानंद के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित है। पुस्तक के हिंदी अनुवादक जगदीश कपूर ने जानकारी दी कि स्वामी कृष्णानंद मंडी के निवासी थे और उनका मूल नाम हरदेव था। उन्होंने गुजरात के सिंध क्षेत्र में कई क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। उनके जीवन पर आधारित यह पुस्तक मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई थी, जिसका हिंदी अनुवाद अब पाठकों के लिए उपलब्ध कराया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरदार पटेल विश्वविद्यालय में शनिवार को मंडी से जुड़ी दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन कुलपति प्रोफेसर ललित कुमार अवस्थी की ओर से किया गया।
पहली पुस्तक मंडयाली हास्य कविता संग्रह है, जिसे विनोद बहल ने लिखा है। उन्होंने बताया कि पुस्तक का शीर्षक लाड़ी री झणांग.. है, जिसका अर्थ पत्नी की लताड़ या डांट होता है। इस संग्रह में कुल 55 हास्य कविताएं शामिल हैं, जिनमें पत्नी की डांट से लेकर जन्म से मृत्यु तक के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का रोचक वर्णन किया गया है। सभी कविताएं मंडयाली बोली में लिखी गई हैं, लेकिन पाठकों की सुविधा के लिए उनका हिंदी अनुवाद भी साथ में दिया गया है।
दूसरी पुस्तक वीर स्वतंत्रता सेनानी स्वामी कृष्णानंद के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित है। पुस्तक के हिंदी अनुवादक जगदीश कपूर ने जानकारी दी कि स्वामी कृष्णानंद मंडी के निवासी थे और उनका मूल नाम हरदेव था। उन्होंने गुजरात के सिंध क्षेत्र में कई क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। उनके जीवन पर आधारित यह पुस्तक मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई थी, जिसका हिंदी अनुवाद अब पाठकों के लिए उपलब्ध कराया गया है।
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