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Mandi News: जैसा नाम, वैसा ही दिखे सुंदरनगर शहर
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नगर परिषद चुनाव में शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने की उठी मांग
मतदाताओं ने नदी-नालों का तटीकरण भी मुद्दा भी उठाया
देवेंद्र गुप्ता
सुंदरनगर (मंडी)। नगर परिषद के चुनावी शोरगुल में सुंदरनगर को प्रदूषण मुक्त करने का मुद्दा भी जोरशोर से उठ रहा है। नदी-नालों के तटीकरण की मांग के साथ लगातार बढ़ रही प्रवासियों की काॅलोनियों को लेकर भी मतदाता आवाज उठा रहे हैं।
मतदाता शहर में डंपिंग साइट के प्रदूषण से चिंतित हैं। वहीं, शहर के कई वार्डों में पुराने नालों को स्वच्छ कर उनके तटीकरण की मांग भी कर रहे हैं। इसके अलावा शहर में बढ़ रही अवैध झुग्गी-झोपड़ियों पर भी कई वार्ड में लोग मुखर हैं। वहीं, बाजारों को वाहन मुक्त करने के साथ शहर की पुरानी धरोहरें समेटने और पेड़ कटान का मुद्दा भी गूंज रहा है। शहरवासी सुंदरनगर के सही मायने में नाम के अनुरूप इसको सुंदर बनाने की उम्मीदवारों से उम्मीद कर रहे हैं।
सुंदरनगर शहर नाम और काम से सुंदर तभी दिखेगा,जब इस शहर को नियम और कायदों में बांधा जाए। अक्सर पार्षद अपने चुनाव जीतने के बाद वार्ड को सुलभ और स्वच्छ बनाने के बजाय उसमें ठेकेदारों को कहां जैसे फायदा मिले, उस पर ज्यादा गौर करते हैं। शहर के हर वार्ड में एक सिविल सोसायटी का गठन कर गलत निर्माण और कामों को रोका जाए।
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-प्रकाश बंसल, अधिवक्ता
बेवजह विकास के नाम पर पेड़ों का कटान नहीं होना चाहिए। शहर के नाले स्वच्छ पानी बहाने के बजाय शहर के घरों की गंदगी उड़ेल रहे हैं। नालों का तटीकरण होना चाहिए। दूसरी तरफ बेलगाम प्रवासी लोगों की झोपड़ियों को भी बढ़ने से रोका जाए जो शहर के नालों के आसपास डेरा जमाए हुए हैं। सुंदरनगर की डंपिंग साइट का आधुनिकीकरण भी जरूरी है।
-डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, पर्यावरण प्रेमी
सुंदरनगर ऐतिहासिक रूप से पुरानी रियासत के साथ पुराना कारोबारी शहर भी है। इसके मुख्य बाजारों को वाहन मुक्त कर इसे मॉल रोड की तर्ज पर विकसित किया जाना चाहिए ताकि हर ग्राहक की पहुंच हर दुकान तक हो। इसके अलावा बाजार में ऐसे स्थान चिह्नित हों जहां एक जगह पर अच्छी पार्किंग की व्यवस्था हो।
संजय पंसारी, व्यापारी भोजपुर
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मतदाताओं ने नदी-नालों का तटीकरण भी मुद्दा भी उठाया
देवेंद्र गुप्ता
सुंदरनगर (मंडी)। नगर परिषद के चुनावी शोरगुल में सुंदरनगर को प्रदूषण मुक्त करने का मुद्दा भी जोरशोर से उठ रहा है। नदी-नालों के तटीकरण की मांग के साथ लगातार बढ़ रही प्रवासियों की काॅलोनियों को लेकर भी मतदाता आवाज उठा रहे हैं।
मतदाता शहर में डंपिंग साइट के प्रदूषण से चिंतित हैं। वहीं, शहर के कई वार्डों में पुराने नालों को स्वच्छ कर उनके तटीकरण की मांग भी कर रहे हैं। इसके अलावा शहर में बढ़ रही अवैध झुग्गी-झोपड़ियों पर भी कई वार्ड में लोग मुखर हैं। वहीं, बाजारों को वाहन मुक्त करने के साथ शहर की पुरानी धरोहरें समेटने और पेड़ कटान का मुद्दा भी गूंज रहा है। शहरवासी सुंदरनगर के सही मायने में नाम के अनुरूप इसको सुंदर बनाने की उम्मीदवारों से उम्मीद कर रहे हैं।
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सुंदरनगर शहर नाम और काम से सुंदर तभी दिखेगा,जब इस शहर को नियम और कायदों में बांधा जाए। अक्सर पार्षद अपने चुनाव जीतने के बाद वार्ड को सुलभ और स्वच्छ बनाने के बजाय उसमें ठेकेदारों को कहां जैसे फायदा मिले, उस पर ज्यादा गौर करते हैं। शहर के हर वार्ड में एक सिविल सोसायटी का गठन कर गलत निर्माण और कामों को रोका जाए।
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-प्रकाश बंसल, अधिवक्ता
बेवजह विकास के नाम पर पेड़ों का कटान नहीं होना चाहिए। शहर के नाले स्वच्छ पानी बहाने के बजाय शहर के घरों की गंदगी उड़ेल रहे हैं। नालों का तटीकरण होना चाहिए। दूसरी तरफ बेलगाम प्रवासी लोगों की झोपड़ियों को भी बढ़ने से रोका जाए जो शहर के नालों के आसपास डेरा जमाए हुए हैं। सुंदरनगर की डंपिंग साइट का आधुनिकीकरण भी जरूरी है।
-डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, पर्यावरण प्रेमी
सुंदरनगर ऐतिहासिक रूप से पुरानी रियासत के साथ पुराना कारोबारी शहर भी है। इसके मुख्य बाजारों को वाहन मुक्त कर इसे मॉल रोड की तर्ज पर विकसित किया जाना चाहिए ताकि हर ग्राहक की पहुंच हर दुकान तक हो। इसके अलावा बाजार में ऐसे स्थान चिह्नित हों जहां एक जगह पर अच्छी पार्किंग की व्यवस्था हो।
संजय पंसारी, व्यापारी भोजपुर