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सेमेस्टर प्रणाली अगले वर्ष से शुरू करें : प्रवक्ता संघ
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मंडी। प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने शिक्षा बोर्ड की ओर से सेमेस्टर सिस्टम आनन-फानन में लागू करने का विरोध किया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष केसर सिंह ठाकुर और महासचिव संजीव ठाकुर ने बताया कि सेमेस्टर प्रणाली को लागू करने के लिए हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड ने वेबसाइट पर छमाही परीक्षाओं के लिए डाला पाठ्यक्रम व्यवहारिक नहीं है।
केसर सिंह ने कहा कि बोर्ड द्वारा जब इतना बड़ा निर्णय लिया गया तो इस संबंध में शिक्षक संगठनों से कोई चर्चा नहीं की। इस व्यवस्था को अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू करने की मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि अगले वर्ष से प्रथम टर्म सितंबर और दूसरा टर्म मार्च में होना चाहिए। प्रवक्ता संघ ने आरोप लगाया कि बोर्ड द्वारा बनाए कुछ विषयों के पाठ्यक्रम में जहां हटाए गए पाठ्यक्रम को भी डाला गया, वहीं कुछ विषयों के पाठ्यक्रम को छोड़ दिया है। इसके साथ कुछ विषयों में दोनों छमाही में एक ही विषयवस्तु को शामिल गया है।
उन्होंने कहा कि आनन-फानन में बनाया पाठ्यक्रम शिक्षकों और शिक्षर्थियों ही परेशान करने वाला है। उन्होंने बोर्ड से अपील की कि पाठ्यक्रम को अधिक व्यवहारिक बनाने के लिए इस पर गंभीरता से पुनर्विचार किया करें। सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने का ये उचित समय नहीं है। बोर्ड इस व्यवस्था के अनुसार नवंबर में पहले टर्म आयोजित कर रहा है। केवल मात्र एक महीने का समय शेष बचा है। अगर पहला टर्म नवंबर में आयोजित करना था तो सितंबर में पहले टर्म करवाने की क्या आवश्यकता थी।
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नवंबर में पहला टर्म जनवरी-फरवरी में छुट्टियां और मार्च में दूसरा टर्म समझ से परे है। उन्होंने शीतकालीन अवकाश में नवंबर के बाद मात्र एक माह दिसंबर तथा केवल 15 कार्य दिवस फरवरी के ही शेष रह जाएंगे। इसमें दूसरी छमाही का पाठ्यक्रम पूरा करवाना शिक्षकों के लिए बढ़ी चुनौती है।
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केसर सिंह ने कहा कि बोर्ड द्वारा जब इतना बड़ा निर्णय लिया गया तो इस संबंध में शिक्षक संगठनों से कोई चर्चा नहीं की। इस व्यवस्था को अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू करने की मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि अगले वर्ष से प्रथम टर्म सितंबर और दूसरा टर्म मार्च में होना चाहिए। प्रवक्ता संघ ने आरोप लगाया कि बोर्ड द्वारा बनाए कुछ विषयों के पाठ्यक्रम में जहां हटाए गए पाठ्यक्रम को भी डाला गया, वहीं कुछ विषयों के पाठ्यक्रम को छोड़ दिया है। इसके साथ कुछ विषयों में दोनों छमाही में एक ही विषयवस्तु को शामिल गया है।
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उन्होंने कहा कि आनन-फानन में बनाया पाठ्यक्रम शिक्षकों और शिक्षर्थियों ही परेशान करने वाला है। उन्होंने बोर्ड से अपील की कि पाठ्यक्रम को अधिक व्यवहारिक बनाने के लिए इस पर गंभीरता से पुनर्विचार किया करें। सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने का ये उचित समय नहीं है। बोर्ड इस व्यवस्था के अनुसार नवंबर में पहले टर्म आयोजित कर रहा है। केवल मात्र एक महीने का समय शेष बचा है। अगर पहला टर्म नवंबर में आयोजित करना था तो सितंबर में पहले टर्म करवाने की क्या आवश्यकता थी।
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नवंबर में पहला टर्म जनवरी-फरवरी में छुट्टियां और मार्च में दूसरा टर्म समझ से परे है। उन्होंने शीतकालीन अवकाश में नवंबर के बाद मात्र एक माह दिसंबर तथा केवल 15 कार्य दिवस फरवरी के ही शेष रह जाएंगे। इसमें दूसरी छमाही का पाठ्यक्रम पूरा करवाना शिक्षकों के लिए बढ़ी चुनौती है।