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Mandi News: मंडयाली बोली का डाटाबेस तैयार करेंगे एसपीयू के विद्यार्थी
Tue, 24 Sep 2024 06:43 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Tue, 24 Sep 2024 06:43 AM IST
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एसपीयू मंडी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ.श्वेता चौहान को सम्मानित करते हुए प्रो. अन
मंडी। क्षेत्रीय भाषाओं के विलुप्त होने की चिंता के बीच सरदार पटेल विश्वविद्यालय (एसपीयू) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं इतिहास विभाग की संयुक्त तत्वावधान में मंडयाली बोली का डाटाबेस तैयार किया जाएगा। इस डाटाबेस के माध्यम से भविष्य में बोली की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी।
माधव इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ग्वालियर की सहायक आचार्य डॉ. श्वेता चौहान ने एसपीयू मंडी में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत मंडयाली बोली का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन किया जाएगा। इससे पूर्व कांगड़ी बोली का डाटाबेस भी तैयार किया जा चुका है। मंडयाली बोली के बाद कुल्लवी अन्य बोलियों का भी डाटाबेस तैयार किया जाएगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ज्यादा से ज्यादा इस कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। ताकि ऑनलाइन माध्यम से इस बोली व अन्य भाषा को जान सकें। उधर, एसपीयू के कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में विशेष स्थान दिया गया है। जिसके अनुरूप विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है। आधुनिकता की दौड़ में भारतीय ज्ञान परंपरा ही हमारा मार्गदर्शन करेगी।
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आचार्य अनुपमा सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़ते हैं और अपनी सभ्यता व संस्कृति का ज्ञान प्राप्त करते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि भविष्य में प्रकोष्ठ विभिन्न प्रकार के व्याख्यान, संगोष्ठियां, परिसंवाद और कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृति से जोड़ेगा। इस कार्यक्रम में दक्षा शर्मा, सहायक आचार्य डॉ. रामपाल, विकेश कुमार, राजेश कुमार, कृष्ण कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे।
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माधव इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ग्वालियर की सहायक आचार्य डॉ. श्वेता चौहान ने एसपीयू मंडी में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत मंडयाली बोली का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन किया जाएगा। इससे पूर्व कांगड़ी बोली का डाटाबेस भी तैयार किया जा चुका है। मंडयाली बोली के बाद कुल्लवी अन्य बोलियों का भी डाटाबेस तैयार किया जाएगा।
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उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ज्यादा से ज्यादा इस कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। ताकि ऑनलाइन माध्यम से इस बोली व अन्य भाषा को जान सकें। उधर, एसपीयू के कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में विशेष स्थान दिया गया है। जिसके अनुरूप विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है। आधुनिकता की दौड़ में भारतीय ज्ञान परंपरा ही हमारा मार्गदर्शन करेगी।
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आचार्य अनुपमा सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़ते हैं और अपनी सभ्यता व संस्कृति का ज्ञान प्राप्त करते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि भविष्य में प्रकोष्ठ विभिन्न प्रकार के व्याख्यान, संगोष्ठियां, परिसंवाद और कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृति से जोड़ेगा। इस कार्यक्रम में दक्षा शर्मा, सहायक आचार्य डॉ. रामपाल, विकेश कुमार, राजेश कुमार, कृष्ण कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे।