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Mandi News: स्वास्थ्य विभाग के सात पेयजल सैंपल फेल, जल शक्ति विभाग के 212 पास
Thu, 12 Feb 2026 06:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 12 Feb 2026 06:59 AM IST
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गोहर (मंडी)। स्वास्थ्य खंड बगस्याड़ के तहत पीलिया के मामलों की संख्या 110 तक पहुंच चुकी है लेकिन हैरानी की बात यह है कि जल शक्ति विभाग द्वारा अपनी ही प्रयोगशालाओं में जांचे गए सभी पेयजल नमूने सफल पाए गए हैं। इससे जल शक्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े कुछ और बयां कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार जल शक्ति विभाग की योजनाओं के तीन नमूने लिए हैं जो विभाग की प्रयोगशाला में फेल पाए गए। दूसरी बार स्वास्थ्य विभाग ने 6 नमूने लिए जिसमें 4 फेल पाए गए जबकि जल शक्ति विभाग के आंकड़े कुछ और तस्वीर दिखा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार पीलिया फैलने के बाद जल शक्ति विभाग ने विभिन्न पेयजल योजनाओं के कुल 212 नमूने बग्गी और मंडी स्थित विभागीय प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे, जिन्हें सभी को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप बताया गया है। वहीं विभाग ने 6 नमूने चंडीगढ़ की निजी प्रयोगशाला में भी भेजे हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
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इसके उलट बावड़ियों के 65 नमूनों में से 30 नमूने फेल पाए गए हैं। सवाल यह उठता है कि जब विभाग अपनी योजनाओं के पानी को खुद ही जांच रहा है और सभी नमूने पास बता रहा है तो क्षेत्र में पीलिया लगातार क्यों फैल रहा है। अगर पानी पूरी तरह सुरक्षित है तो फिर लोग बीमार कैसे हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों में सुनील, कर्ण, ज्ञान चंद शर्मा, धीरज व अन्य का कहना है कि विभाग खुद ही सैंपल ले रहा है और खुद ही जांच कर रहा है। ऐसे में निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजमी है। लोगों का आरोप है कि विभाग अपनी पेयजल योजनाओं को क्लीन चिट देकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ रहा है जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।
इसी को लेकर अब चैलचौक और गोहर की पेयजल योजनाओं के पानी के नमूनों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाहरी और निष्पक्ष जांच नहीं होगी तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी और पीलिया पर भी प्रभावी रोक नहीं लग पाएगी।
क्षेत्र में लगातार बढ़ते पीलिया के मामलों और विभागीय रिपोर्टों के बीच भारी विरोधाभास ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि जल शक्ति विभाग इन सवालों पर क्या जवाब देता है और स्वतंत्र जांच की मांग पर क्या कदम उठाता है।
विभाग की ओर से करवाई गई जांच में जल शक्ति विभाग के सात पेयजल सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
-डॉॅ. राकेश रोशन, बीएमओ बगस्याड़
जल शक्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग की सैंपल रिपोर्ट में थोड़ा ही अंतर है।
-दत्त राम ठाकुर, सहायक अभियंता, जल शक्ति विभाग
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स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार जल शक्ति विभाग की योजनाओं के तीन नमूने लिए हैं जो विभाग की प्रयोगशाला में फेल पाए गए। दूसरी बार स्वास्थ्य विभाग ने 6 नमूने लिए जिसमें 4 फेल पाए गए जबकि जल शक्ति विभाग के आंकड़े कुछ और तस्वीर दिखा रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार पीलिया फैलने के बाद जल शक्ति विभाग ने विभिन्न पेयजल योजनाओं के कुल 212 नमूने बग्गी और मंडी स्थित विभागीय प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे, जिन्हें सभी को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप बताया गया है। वहीं विभाग ने 6 नमूने चंडीगढ़ की निजी प्रयोगशाला में भी भेजे हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
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इसके उलट बावड़ियों के 65 नमूनों में से 30 नमूने फेल पाए गए हैं। सवाल यह उठता है कि जब विभाग अपनी योजनाओं के पानी को खुद ही जांच रहा है और सभी नमूने पास बता रहा है तो क्षेत्र में पीलिया लगातार क्यों फैल रहा है। अगर पानी पूरी तरह सुरक्षित है तो फिर लोग बीमार कैसे हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों में सुनील, कर्ण, ज्ञान चंद शर्मा, धीरज व अन्य का कहना है कि विभाग खुद ही सैंपल ले रहा है और खुद ही जांच कर रहा है। ऐसे में निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजमी है। लोगों का आरोप है कि विभाग अपनी पेयजल योजनाओं को क्लीन चिट देकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ रहा है जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।
इसी को लेकर अब चैलचौक और गोहर की पेयजल योजनाओं के पानी के नमूनों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाहरी और निष्पक्ष जांच नहीं होगी तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी और पीलिया पर भी प्रभावी रोक नहीं लग पाएगी।
क्षेत्र में लगातार बढ़ते पीलिया के मामलों और विभागीय रिपोर्टों के बीच भारी विरोधाभास ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि जल शक्ति विभाग इन सवालों पर क्या जवाब देता है और स्वतंत्र जांच की मांग पर क्या कदम उठाता है।
विभाग की ओर से करवाई गई जांच में जल शक्ति विभाग के सात पेयजल सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
-डॉॅ. राकेश रोशन, बीएमओ बगस्याड़
जल शक्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग की सैंपल रिपोर्ट में थोड़ा ही अंतर है।
-दत्त राम ठाकुर, सहायक अभियंता, जल शक्ति विभाग