फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Mandi News ›   Setback for NHAI: Two petitions dismissed, arbitrator's award upheld

Mandi News: एनएचएआई को झटका, दो याचिकाएं खारिज, मध्यस्थ का अवार्ड बरकरार

Tue, 23 Dec 2025 11:11 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Tue, 23 Dec 2025 11:11 AM IST
विज्ञापन
Setback for NHAI: Two petitions dismissed, arbitrator's award upheld
मंडी। जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग-21 (चंडीगढ़-मंडी-कुल्लू) फोरलेन परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि और संरचनाओं के मुआवजे से जुड़े विवादों पर अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन्हें खारिज कर दिया और मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) द्वारा पारित अवार्ड को यथावत रखा।
विज्ञापन

इन याचिकाओं में दो एनएचएआई की थीं, जो भूमि मुआवजे और संरचना मुआवजे के खिलाफ थी, जबकि एक याचिका भू-स्वामियों की थी। इसमें भू-स्वामियों की ओर से सरचनाओं के मूल्यांकन में वृद्धि और मल्टीप्लायर-2 की मांग की गई थी।
विज्ञापन

पहले मामले में तहसील बल्ह के गांव दौंधी में अधिग्रहित भूमि के मामले में भू-स्वामी खेम राज अवस्थी ने मुआवजे को कम बताते हुए मध्यस्थ से गुहार लगाई थी। मध्यस्थ ने 17 नवंबर 2023 को मुआवजा राशि बढ़ाने से तो इनकार किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यदि मुआवजे के भुगतान में देरी हुई है तो भू-स्वामी 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत ब्याज पाने का हकदार होगा। इसके तहत पहले वर्ष 9 फीसदी और उसके बाद 15 फीसदी वार्षिक ब्याज तय किया गया। एनएचएआई ने इस ब्याज दर के खिलाफ एक याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


मामला 2 : एनएचएआई और भू-स्वामियों की याचिकाएं खारिज

एनएच-21 के चौड़ीकरण के लिए संरचनाओं (इमारतों) के मुआवजे को लेकर दो विपरीत याचिकाएं दायर की गई थीं। एनएचएआई ने मध्यस्थ द्वारा 6 मार्च 2024 को दिए गए वैधानिक लाभों और ब्याज के आदेश को चुनौती दी थी। दूसरी ओर भूमि मालिकों ने अपनी याचिका में संरचनाओं के मूल्यांकन में वृद्धि, 12 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा और मल्टीप्लायर-2 लागू करने की मांग की थी। जिला न्यायाधीश ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि मध्यस्थ द्वारा पारित अवार्ड न तो सार्वजनिक नीति के विरुद्ध है और न ही इसमें कोई प्रत्यक्ष कानूनी त्रुटि है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत भू-स्वामी वैधानिक लाभों के हकदार हैं, लेकिन साथ ही संरचनाओं के मौजूदा मूल्यांकन को भी सही ठहराया। इस निर्णय के साथ ही एनएचएआई और भू-स्वामियों दोनों की आपत्तियां अस्वीकार कर दी गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed