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Mandi News: स्कूटी निर्माता कंपनी उपभोक्ता को दें 40 हजार रुपये का हर्जाना
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मंडी। जिला उपभोक्ता आयोग ने स्कूटी निर्माता कंपनी को उपभोक्ता के पक्ष में 40 हजार रुपये हर्जाना और पांच हजार रुपये शिकायत व्यय अदा करने का फैसला सुनाया है। आयोग के अध्यक्ष पुरेंद्र वैद्य और सदस्य मांचली ठाकुर ने औट तहसील के कोटाधार (पनारसा) निवासी अश्वनी राठी की शिकायत को उचित मानते हुए लुधियाणा स्थित ओएलए इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी कंपनी को हर्जाना और व्यय देने का फैसला सुनाया है।
आयोग ने फैसले में कंपनी को निर्देश दिया है कि वह उपभोक्ता को मोटर वाहन अधिनियम के तहत फार्म नंबर 21 और 22 के दस्तावेज मुहैया करवाए। इसके अलावा कंपनी को इनवाइस स्टैंप ऑफ डीलर और डीलर का पूर्ण पता शिकायतकर्ता को सौंपने के भी निर्देश दिए हैं। इससे उपभोक्ता अपनी स्कूटी को पंजीकृत करवा सके। पंजीकरण प्रमाण पत्र के बिना शिकायतकर्ता वाहन चलाने से वंचित है। ऐसे में शिकायतकर्ता को परेशानी का सामना करना पड़ा और उन्हें मानसिक यंत्रणा का शिकार होना पड़ा।
शिकायतकर्ता ने आयोग में शिकायत दायर की थी कि उन्होंने जून 2023 में उक्त कंपनी से एक स्कूटी खरीदी थी। शिकायतकर्ता ने कंपनी को वाहन की कीमत के अलावा पंजीकरण प्रमाण पत्र दस्तावेज आदि तैयार करने की राशि भी अदा कर दी थी। शिकायतकर्ता को वाहन तो सौंप दिया गया लेकिन इसके दस्तावेज नहीं सौंपे गए। उन्होंने आयोग में यह शिकायत दायर की थी। आयोग की कार्रवाई के दौरान कंपनी की ओर से भाग नहीं लिया गया। इसके कारण आयोग ने एकतरफा फैसला सुनाते हुए कंपनी को उक्त निर्देशों के साथ उपभोक्ता के पक्ष में हर्जाना और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया है। संवाद
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आयोग ने फैसले में कंपनी को निर्देश दिया है कि वह उपभोक्ता को मोटर वाहन अधिनियम के तहत फार्म नंबर 21 और 22 के दस्तावेज मुहैया करवाए। इसके अलावा कंपनी को इनवाइस स्टैंप ऑफ डीलर और डीलर का पूर्ण पता शिकायतकर्ता को सौंपने के भी निर्देश दिए हैं। इससे उपभोक्ता अपनी स्कूटी को पंजीकृत करवा सके। पंजीकरण प्रमाण पत्र के बिना शिकायतकर्ता वाहन चलाने से वंचित है। ऐसे में शिकायतकर्ता को परेशानी का सामना करना पड़ा और उन्हें मानसिक यंत्रणा का शिकार होना पड़ा।
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शिकायतकर्ता ने आयोग में शिकायत दायर की थी कि उन्होंने जून 2023 में उक्त कंपनी से एक स्कूटी खरीदी थी। शिकायतकर्ता ने कंपनी को वाहन की कीमत के अलावा पंजीकरण प्रमाण पत्र दस्तावेज आदि तैयार करने की राशि भी अदा कर दी थी। शिकायतकर्ता को वाहन तो सौंप दिया गया लेकिन इसके दस्तावेज नहीं सौंपे गए। उन्होंने आयोग में यह शिकायत दायर की थी। आयोग की कार्रवाई के दौरान कंपनी की ओर से भाग नहीं लिया गया। इसके कारण आयोग ने एकतरफा फैसला सुनाते हुए कंपनी को उक्त निर्देशों के साथ उपभोक्ता के पक्ष में हर्जाना और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया है। संवाद
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