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Mandi News: सरकाघाट के गध्यानी क्लस्टर ने लिखी सफलता की नई गाथा
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1.2 हेक्टेयर भूमि पर लहलहा रही उन्न्त किस्म के अमरूद की फसल
किसान अमरूद की खेती से कमा रहे लाखों की आय
संवाद न्यूज एजेंसी
सरकाघाट (मंडी)। उपमंडल का गध्यानी क्लस्टर एचपी शिवा परियोजना की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण बन कर उभरा है। यह क्लस्टर बागवानी के जरिए किसानों की तकदीर बदलने की कहानी बयां कर रहा है।
वर्तमान में लगभग 1.2 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित बगीचे में उन्नत किस्म के अमरूद की फसल लहलहा रही है। यहां अमरूद की स्वेता और ललित प्रजाति के लगभग 1200 पौधे तीन वर्ष पूर्व रोपित किए गए थे। क्लस्टर से जुड़े 7 लाभार्थी किसान अब अपनी उपज को बाजार भेजने की तैयारी में हैं।
लाभार्थी हेमराज ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने लगभग 60 से 70 हजार रुपये कमाए, लेकिन इस वर्ष बाजार में अमरूद की कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनकी आमदनी लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक हो जाएगी।
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एक अन्य लाभार्थी मनोहर लाल के अनुसार अमरूद की यह प्रजाति बहुत ही उम्दा और मीठी है। इससे उन्हें बाजार में अच्छे दाम मिलने का पूरा भरोसा है। लोग बगीचे में आकर ही अमरूद खरीद रहे हैं।
लाभार्थी किसान मीरा देवी कहती हैं कि पहले वे पारंपरिक खेती से जुड़ी थीं। वे जो भी फसल उगाते थे, उसमें अधिक लाभ नहीं होता था। परियोजना के तहत सोलर बाड़बंदी से फसल नुकसान की समस्या भी हल हुई है। साथ ही उन्नत किस्म के पौधे अच्छी पैदावार दे रहे हैं।
उधर, विषयवाद विशेषज्ञ सरकाघाट डॉ. अनिल ठाकुर ने बताया कि शिवा परियोजना के अंतर्गत गोपालपुर क्षेत्र में अब तक 10 प्रथम पंक्ति प्रदर्शन उद्यान स्थापित किए जा चुके हैं। 13 क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इनमें से कुछ क्लस्टरों में इस वर्ष पौधरोपण पूरा कर लिया गया है। इन क्लस्टरों में मौसमी, अमरूद और लीची की उन्नत खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। संवाद
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किसान अमरूद की खेती से कमा रहे लाखों की आय
संवाद न्यूज एजेंसी
सरकाघाट (मंडी)। उपमंडल का गध्यानी क्लस्टर एचपी शिवा परियोजना की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण बन कर उभरा है। यह क्लस्टर बागवानी के जरिए किसानों की तकदीर बदलने की कहानी बयां कर रहा है।
वर्तमान में लगभग 1.2 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित बगीचे में उन्नत किस्म के अमरूद की फसल लहलहा रही है। यहां अमरूद की स्वेता और ललित प्रजाति के लगभग 1200 पौधे तीन वर्ष पूर्व रोपित किए गए थे। क्लस्टर से जुड़े 7 लाभार्थी किसान अब अपनी उपज को बाजार भेजने की तैयारी में हैं।
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लाभार्थी हेमराज ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने लगभग 60 से 70 हजार रुपये कमाए, लेकिन इस वर्ष बाजार में अमरूद की कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनकी आमदनी लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक हो जाएगी।
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एक अन्य लाभार्थी मनोहर लाल के अनुसार अमरूद की यह प्रजाति बहुत ही उम्दा और मीठी है। इससे उन्हें बाजार में अच्छे दाम मिलने का पूरा भरोसा है। लोग बगीचे में आकर ही अमरूद खरीद रहे हैं।
लाभार्थी किसान मीरा देवी कहती हैं कि पहले वे पारंपरिक खेती से जुड़ी थीं। वे जो भी फसल उगाते थे, उसमें अधिक लाभ नहीं होता था। परियोजना के तहत सोलर बाड़बंदी से फसल नुकसान की समस्या भी हल हुई है। साथ ही उन्नत किस्म के पौधे अच्छी पैदावार दे रहे हैं।
उधर, विषयवाद विशेषज्ञ सरकाघाट डॉ. अनिल ठाकुर ने बताया कि शिवा परियोजना के अंतर्गत गोपालपुर क्षेत्र में अब तक 10 प्रथम पंक्ति प्रदर्शन उद्यान स्थापित किए जा चुके हैं। 13 क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इनमें से कुछ क्लस्टरों में इस वर्ष पौधरोपण पूरा कर लिया गया है। इन क्लस्टरों में मौसमी, अमरूद और लीची की उन्नत खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। संवाद