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सेरी मंच से शुरू हुआ संगत का सफर, यहीं मिली प्रेरणा : ममता भारद्वाज
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मंडी की बेटी और ऊना की बहू ने दूसरी सांस्कृतिक संध्या में बतौर स्टार कलाकार पहुंची
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मंडी की बेटी और जिला ऊना की बहू ममता भारद्वाज का संगीत का सफर सेरी मंच से शुरू हुआ और अब इसी मंच पर वे बतौर स्टार कलाकार बुलाईं गई हैं। मंडी में परफारमेंस के लिए पहुंची लोक गायिका ममता भारद्वाज ने खास बातचीत में कहा कि सेरी मंच उनके जीवन की सफल का पहला मंच है। यहीं से उन्हें प्रेरणा मिली और उन्होंने अपना संगीत करिअॅर का आगाज किया।
ममता भारद्वाज ने बताया कि उनकी स्व मां इंदिरा देवी का सपना था कि उनकी बेटी एक प्रतिष्ठित गायिका बनें। माता रानी की कृपा से ही सब हुआ है। घर में संगीत का माहौल था, पिता राजेंद्रपाल और माता स्वयं गुनगुनाते थे। उन्हीं से सीखकर अपनी यात्रा शुरू की। 19 वर्ष की उम्र में पहली बार शिवरात्रि के लिए ऑडिशन दिया और उन्हें एक साथ पांच गीत गाने का मौका दिया गया। यहीं से उनकी जिंदगी में बदलाव हुआ। इसके बाद वायस ऑफ मंडी, सारेगामापा, वॉयस ऑफ पंजाब में रनरअप रहीं। जबकि अनेक मंचों और जागरण में भाग लिया। बताया कि उन्होंने पंजाबी गायक मास्टर सलीम और ऋचा शर्मा को सुन सुन कर जागरण गायन सीखा है। वे मूल रूप मंडी जिला के चैलचौक की रहने वाली हैं और ऊना में उनकी शादी हुई है। ससुराल पक्ष का उन्हें भरपूर स्नेह और सहयोग संगीत के लिए मिलता है। बताया कि जल्द टी सीरिज की ओर से उनके 12 हिंदी गीतों को लांच किया जा रहा है। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और बड़े भाई पवन देवगण, संगीत गुरु डॉ. बृजलाल भारद्वाज को दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मंडी की बेटी और जिला ऊना की बहू ममता भारद्वाज का संगीत का सफर सेरी मंच से शुरू हुआ और अब इसी मंच पर वे बतौर स्टार कलाकार बुलाईं गई हैं। मंडी में परफारमेंस के लिए पहुंची लोक गायिका ममता भारद्वाज ने खास बातचीत में कहा कि सेरी मंच उनके जीवन की सफल का पहला मंच है। यहीं से उन्हें प्रेरणा मिली और उन्होंने अपना संगीत करिअॅर का आगाज किया।
ममता भारद्वाज ने बताया कि उनकी स्व मां इंदिरा देवी का सपना था कि उनकी बेटी एक प्रतिष्ठित गायिका बनें। माता रानी की कृपा से ही सब हुआ है। घर में संगीत का माहौल था, पिता राजेंद्रपाल और माता स्वयं गुनगुनाते थे। उन्हीं से सीखकर अपनी यात्रा शुरू की। 19 वर्ष की उम्र में पहली बार शिवरात्रि के लिए ऑडिशन दिया और उन्हें एक साथ पांच गीत गाने का मौका दिया गया। यहीं से उनकी जिंदगी में बदलाव हुआ। इसके बाद वायस ऑफ मंडी, सारेगामापा, वॉयस ऑफ पंजाब में रनरअप रहीं। जबकि अनेक मंचों और जागरण में भाग लिया। बताया कि उन्होंने पंजाबी गायक मास्टर सलीम और ऋचा शर्मा को सुन सुन कर जागरण गायन सीखा है। वे मूल रूप मंडी जिला के चैलचौक की रहने वाली हैं और ऊना में उनकी शादी हुई है। ससुराल पक्ष का उन्हें भरपूर स्नेह और सहयोग संगीत के लिए मिलता है। बताया कि जल्द टी सीरिज की ओर से उनके 12 हिंदी गीतों को लांच किया जा रहा है। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और बड़े भाई पवन देवगण, संगीत गुरु डॉ. बृजलाल भारद्वाज को दिया है।
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