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Mandi News: टूटे पुलों और जगह-जगह भूस्खलन ने रोके रेस्क्यू टीमों के कदम

Thu, 01 Aug 2024 07:09 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Thu, 01 Aug 2024 07:09 PM IST
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Rescue teams reached after walking about 7 km
करीब 7 किमी पैदल चलकर पहुंचीं रेस्क्यू टीमें
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लाइफ डिटेक्टर डिवाइस को भी किया इस्तेमाल, नहीं लगा कोई सुराग, रात को ही सूचना मिलते ही अलर्ट हुआ प्रशासन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। पुल टूटने और जगह-जगह हुए भूस्खलन ने खोज और बचाव के लिए चौहार घाटी के राजबन में जा रही टीमों की रफ्तार धीमी कर दी। कड़ी चुनौतियों के बीच सात किलोमीटर पैदल चलकर ही उपकरणों सहित जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू टीमें राजवन पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सुबह से लेकर देरशाम तक यह अभियान चलता रहा। हालांकि टीम को मलबे में दबा जीवित व्यक्ति कोई नहीं मिला, लेकिन तीन शव मलबे से बरामद हो गए।
बुधवार रात को ही घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन अलर्ट हुआ। मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य टीमें रवाना की गईं, लेकिन थल्टूखोड़ के समीप पुल ध्वस्त होने और जगह-जगह भूस्खलन ने दिक्कतें बढ़ाईं। हालांकि इसके बावजूद टीम ने हौसला नहीं हारा और पैदल ही करीब सात किमी सफर तय किया। मौके पर पहुंचते ही टीम सदस्यों ने विभिन्न उपकरणों के साथ रेस्क्यू शुरू कर दिया। इसके बाद डीसी मंडी अपूर्व देवगन भी मंडी सुबह तड़के ही राजवन के लिए रवाना हो गए, लेकिन थल्टूखोड़ के पास पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण उन्हें भी पैदल ही राजवन तक पहुंचना पड़ा। बीच रास्ते में भूस्खलन को तुरंत हटवाने के लिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए ताकि अभियान में कोई परेशान न आए। उन्होंने इस पूरे अभियान को खुद मॉनिटर किया।
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उधर, रात को ही प्रशासन ने वैकल्पिक रूटों से भी रेस्क्यू टीमों को मौके पर पहुंचाने का प्रयास किया। बैजनाथ प्रशासन की सहायता से बीड़ बिलिंग होते हुए भी जाने का प्रयास किया, लेकिन यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके अलावा सलापड़ भी रेस्क्यू टीमें मौजूद रहीं, जिन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से मौके पर ले जाया जाना था, लेकिन खराब मौसम ने साथ नहीं दिया।
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31 साल बाद हुई बादल फटने की घटना
चौहार घाटी में 31 साल बाद दूसरी बार बादल फटने की घटना हुई है। इससे पहले 1993 में सवाड़ गांव में बादल फटा था। इसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना से समूची चौहार घाटी में मातम छाया हुआ है। सगे संबंधी रिश्तेदार राजबन गांव पहुंच रहे हैं, जबकि आसपास के अलावा अन्य क्षेत्रों के सैकड़ों लोग राहत कार्य में हाथ बंटा रहे हैं। प्रशासन की ओर से सभी विभागों के आलाधिकारी भी घटनास्थल पर मोर्चा संभाले हुए हैं। मृतकों के पोस्टमार्टम को लेकर मेडिकल की विशेष टीम मोर्चे पर जुटी हुई है।

दो नालों के बीच फंसे 35 लोग सुरक्षित निकाले
घटना का पता चलते ही स्थानीय प्रशासन मौके पर मुस्तैद रहा। यहां दो नालों के बीच बीच फंसे 35 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया। वहीं खतरे की जद में आए अन्य परिवारों को ठहरने की व्यवस्था उपमंडल प्रशासन ने मिडल स्कूल ग्रामण में की है। एसडीएम भावना वर्मा ने कहा कि आसपास के मकानों के लिए अभी खतरा बरकरार है। ऐसे में एहतियातन मकान खाली करवा उन्हें शिफ्ट करने को कहा है। विधायक पूर्ण चंद ठाकुर ने स्वयं घटनास्थल पर पहुंच कर पीड़ित परिवारों के साथ दुख दर्द साझा करते हुए शोक जताया और मृतकों के आश्रितों को पांच-पांच हजार रुपये की राहत राशि अपनी ओर से दी। मूसलाधार बारिश से चौहारघाटी की लटराण और तरसवाण पंचायत में भी करोड़ों रुपये के नुकसान की सूचना है।


लाइफ डिटेक्टर डिवाइस का भी किया इस्तेमाल
मलबे के भीतर दबे लोगों का सुराग लगाने के लिए प्रशासन इस बार लाइफ डिटेक्टर डिवाइस का खरीदा है। इसका इस्तेमाल भी राजबन में किया गया, लेकिन कोई हलचल न होने के कारण सुराग नहीं लग पाया। अभियान के तहत धीरे-धीरे मलबे को हटाने का कार्य शुरू हुआ तो अलग-अलग समय में तीन शव बरामद हुए।
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