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Mandi News: जोनल मास्टर प्लान से संवरेंगे धार्मिक स्थल
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थुनाग (मंडी)। ईको सेंसिटिव जोन के विकास के लिए तैयार किए जा रहे जोनल मास्टर प्लान में शिकारी देवी वन्य जीव अभयारण्य से सटे आधा दर्जन धार्मिक स्थलों का भी कायाकल्प होगा। जोनल मास्टर प्लान में धार्मिक स्थलों को उसी के अनुरूप विकसित करने का प्रावधान किया जाएगा। ईको सेंसिटिव जोन में सात धार्मिक स्थल हैं। इनमें संगलबाड़ा पंचायत में गीह नाग मंदिर भुलाह और मूल स्थान रायगढ़ जबकि ग्राम पंचायत ब्रेयोगी में चुंजवाला गढ़ ईको सेंसेटिव जोन में पड़ते हैं।
ग्राम पंचायत धार जरोल में शंकर महादेव देओथान जबकि गुड़ाह पंचायत देव दैंत, काली माता, देव मतलोड़ा और धूमरी माता मंदिर आते हैं। धार जरोल पंचायत के प्रधान नरेश कुमार ने बताया कि प्राचीन शंकर मंदिर के लिए जनेहड़ तक ढाई किलोमीटर का रोपवे बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा मंदिर परिसर में सौर ऊर्जा लाइटें और ब्राइडल पाथ बनाने की योजना है।
संगलबाड़ा पंचायत के प्रधान शोभा राम ने बताया कि गीह नाग मंदिर परिसर की सुरक्षा दीवार और ब्राइडल पाथ का प्रस्ताव पारित किया गया है। गुड़ाह पंचायत के उपप्रधान टिक्कम सिंह ने बताया कि नसरार गांव के देव दैंत, काली माता मंदिर, छनैणी के देवमतलोड़ा और भरमेरी गांव के धूमरी माता मंदिर के पुनर्निर्माण और संरक्षण के प्रस्ताव पारित किए हैं।
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ईको सेंसिटिव जोन में भवनों, संरचनाओं, शिल्प, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों की पहचान कर उनके संरक्षण के लिए अलग से योजना तैयार की जाएगी। मंदिरों, देव स्थान और देव झीलों की भी पहचान कर उनके उन्नयन की योजना संबंधित क्षेत्रों से प्रस्ताव आने के बाद उन्हें जोनल मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा।
-सुरेंद्र कश्यप, वन मंडलाधिकारी, नाचन
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ग्राम पंचायत धार जरोल में शंकर महादेव देओथान जबकि गुड़ाह पंचायत देव दैंत, काली माता, देव मतलोड़ा और धूमरी माता मंदिर आते हैं। धार जरोल पंचायत के प्रधान नरेश कुमार ने बताया कि प्राचीन शंकर मंदिर के लिए जनेहड़ तक ढाई किलोमीटर का रोपवे बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा मंदिर परिसर में सौर ऊर्जा लाइटें और ब्राइडल पाथ बनाने की योजना है।
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संगलबाड़ा पंचायत के प्रधान शोभा राम ने बताया कि गीह नाग मंदिर परिसर की सुरक्षा दीवार और ब्राइडल पाथ का प्रस्ताव पारित किया गया है। गुड़ाह पंचायत के उपप्रधान टिक्कम सिंह ने बताया कि नसरार गांव के देव दैंत, काली माता मंदिर, छनैणी के देवमतलोड़ा और भरमेरी गांव के धूमरी माता मंदिर के पुनर्निर्माण और संरक्षण के प्रस्ताव पारित किए हैं।
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ईको सेंसिटिव जोन में भवनों, संरचनाओं, शिल्प, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों की पहचान कर उनके संरक्षण के लिए अलग से योजना तैयार की जाएगी। मंदिरों, देव स्थान और देव झीलों की भी पहचान कर उनके उन्नयन की योजना संबंधित क्षेत्रों से प्रस्ताव आने के बाद उन्हें जोनल मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा।
-सुरेंद्र कश्यप, वन मंडलाधिकारी, नाचन