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Mandi News: फूलों की खेती में स्वरोजगार चुन कलठा के रविंद्र बने आत्मनिर्भर

Mon, 16 Sep 2024 07:20 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Mon, 16 Sep 2024 07:20 AM IST
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Ravindra of Kaltha became self-reliant by choosing self-employment in flower farming
गोहर (मंडी)। खेतीबाड़ी में रूचि और पारंपरिक खेती से हटकर कार्य करने की पहल ने गोहर क्षेत्र के रविंद्र को आत्मनिर्भर बना दिया है। फूलों की खेती में स्वरोजगार चुनने के बाद वह हर वर्ष लाखों रुपये कमाने सहित स्थानीय लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। कलठा गांव के रविंद्र ने हिमाचल सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं की मदद लेकर सफलता की नई इबारत लिखी है।
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रविंद्र का कहना है कि पहले वह पारंपरिक खेतीबाड़ी करते थे। फिर बागवानी विभाग से मिलकर पारंपरिक खेती को आधुनिक खेती में बदलने का संकल्प लिया। विभाग ने उन्हें पॉलीहाउस लगाकर फूलों की खेती का सुझाव दिया। इसके बाद एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत 2017-18 में 1250 वर्ग मीटर का पॉलीहाउस लगाकर रविंद्र ने कार्नेशन (गुलनार) फूलों की खेती शुरू की।
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फसल अच्छी और बाजार में उचित दाम मिलने के बाद रविंद्र ने हिमाचल पुष्प क्रांति योजना के तहत 500 वर्ग मीटर भूमि पर नया पॉलीहाउस लगाया। अब रविंद्र लगभग 1750 वर्ग मीटर भूमि पर गुलनार के फूलों की खेती कर रहे हैं। हिमाचल पुष्प क्रांति योजना के तहत वर्ष भर उच्च मूल्य वाले फूलों की खेती के लिए किसानों को पॉलिहाउस तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
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रविंद्र का कहना है कि कार्नेशन फूल चंडीगढ़, दिल्ली जैसे शहरों में भेजे जा रहे हैं। इन फूलों की बिक्री से प्रतिवर्ष वे 11 से 12 लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है।
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