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अपने 400 कारदारों संग मूल स्थान पंजाई से 28 फरवरी को रवाना होंगे देव पुंडरिक ऋषि
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मंडी के तहत पुंडरिक ऋषि मंदिर पंजाई बालीचौकी देवदार के जंगल में विराजमान
- फोटो : Mandi
मंडी। श्री देव पुंडरिक ऋषि 28 फरवरी को 400 कारदारों के साथ मूूल स्थान पंजाई बालीचौकी से मंडी शिवरात्रि महोत्सव के लिए पैदल रवाना होंगे।
देव पुंडरिक ऋषि रास्ते में एक दिन का रात्रि ठहराव पंडोह में करेंगे। पुंडरिक ऋषि एक मार्च को शिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी पहुंचेंगे। इस दौरान देवता और कारदार 8 दिन तक जगन्नाथ मंदिर पड्डल में रात्रि ठहराव करेंगे। इसके बाद 9 मार्च को अपने क्षेत्र के लिए रवाना होंगे। देवता का मंदिर मंडी से 45 किलोमीटर बालीचौकी के तहत पंजाई गांव में है। देव रथ रियासतकालीन में मंडी शिवरात्रि महोत्सव में पहुंचता आया है। यह राजाओं के समय से चली आ रही पंरपरा आज दिन तक कायम है। क्षेत्र में कोई भी कार्य देवता के बिना पूछे नहीं किया जाता। देवता के मंदिर प्राचीन शैली से निर्मित है। देवता का सिंहासन खास देवदार की लकड़ी से तैयार है।
देवता के रथ पर आठ सोने के मोहरे लगे हैं। क्षेत्र में आज भी कोई शुभ कार्य करने से पहले देवता से पूछकर ही किया जाता है। चाहे खेतीबाड़ी हो या अन्य शुभ काम करना हो। देवता का मंदिर के चारों ओर लकड़ी की सुंदर नक्काशी की हुुई है। मंदिर के चारों ओर घना देवदार का जंगल है।
श्री देव पुंडरिक ऋषि के कारदार टेक सिंह ने बताया कि देव 28 फरवरी को मंडी के लिए प्रस्थान करेंगे। देवता का रथ दिल्ली तक भी जा चुका है। उस दौरान देवता का तत्कालीन सरकार ने जोरदार स्वागत किया था। उन्होंने बताया कि उस समय उनके पिता राम ठाकुर देवता के कारदार थे।
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देव पुंडरिक ऋषि रास्ते में एक दिन का रात्रि ठहराव पंडोह में करेंगे। पुंडरिक ऋषि एक मार्च को शिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी पहुंचेंगे। इस दौरान देवता और कारदार 8 दिन तक जगन्नाथ मंदिर पड्डल में रात्रि ठहराव करेंगे। इसके बाद 9 मार्च को अपने क्षेत्र के लिए रवाना होंगे। देवता का मंदिर मंडी से 45 किलोमीटर बालीचौकी के तहत पंजाई गांव में है। देव रथ रियासतकालीन में मंडी शिवरात्रि महोत्सव में पहुंचता आया है। यह राजाओं के समय से चली आ रही पंरपरा आज दिन तक कायम है। क्षेत्र में कोई भी कार्य देवता के बिना पूछे नहीं किया जाता। देवता के मंदिर प्राचीन शैली से निर्मित है। देवता का सिंहासन खास देवदार की लकड़ी से तैयार है।
देवता के रथ पर आठ सोने के मोहरे लगे हैं। क्षेत्र में आज भी कोई शुभ कार्य करने से पहले देवता से पूछकर ही किया जाता है। चाहे खेतीबाड़ी हो या अन्य शुभ काम करना हो। देवता का मंदिर के चारों ओर लकड़ी की सुंदर नक्काशी की हुुई है। मंदिर के चारों ओर घना देवदार का जंगल है।
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श्री देव पुंडरिक ऋषि के कारदार टेक सिंह ने बताया कि देव 28 फरवरी को मंडी के लिए प्रस्थान करेंगे। देवता का रथ दिल्ली तक भी जा चुका है। उस दौरान देवता का तत्कालीन सरकार ने जोरदार स्वागत किया था। उन्होंने बताया कि उस समय उनके पिता राम ठाकुर देवता के कारदार थे।
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