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Mandi News: नौ मील में भूस्खलन से निपटने की तैयारी, 39 करोड़ से बनेगी थ्री-लेयर सुरक्षा दीवार
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125 करोड़ रुपये से बनेगा वायर डक्ट, स्वीकृति मिलना बाकी
वायर डक्ट यानी फ्लाईओवर बनने से पहाड़ी से आ रहे मलबे की समस्या होगी हल
विकास की बात
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मंडी-कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-3) के संवेदनशील नौ मील क्षेत्र में भूस्खलन की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। यहां 39 करोड़ रुपये की लागत से 160 मीटर लंबी थ्री-लेयर रिटेनिंग (सुरक्षा) दीवार का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही सड़क को चौड़ा करने की योजना भी है, जिससे इस हिस्से में यातायात अधिक सुरक्षित और सुचारु हो सकेगा।
इसके अलावा करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से वायर डक्ट (गैलरी/फ्लाईओवरनुमा संरचना) बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद यह परियोजना नौ मील क्षेत्र में भूस्खलन से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकती है। नौ मील क्षेत्र हर साल मानसून के दौरान सबसे अधिक प्रभावित रहने वाले हिस्सों में शामिल है। बारिश के समय पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिरने के कारण कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग घंटों तक बंद करना पड़ता है। सुरक्षा के लिहाज से वाहनों को नियंत्रित तरीके से छोड़ा जाता है, जिससे लंबा जाम लग जाता है। बीते वर्षों में यहां कई बड़े भूस्खलन हो चुके हैं, जिनसे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी है।
एनएचएआई की योजना के तहत बनने वाली थ्री-लेयर सुरक्षा दीवार पहाड़ी को मजबूती देगी और ढीली चट्टानों व मलबे को सड़क तक पहुंचने से रोकेगी। साथ ही सड़क चौड़ी होने से वाहनों की आवाजाही भी बेहतर होगी। निर्माण कार्य के लिए तकनीकी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं, प्रस्तावित वायर डक्ट परियोजना इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। फ्लाईओवरनुमा इस संरचना के बनने के बाद पहाड़ी से गिरने वाले मलबे का असर सड़क पर नहीं पड़ेगा और वाहन बिना बाधा गुजर सकेंगे। इससे मानसून के दौरान बार-बार राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। सुरक्षा दीवार और भविष्य में वायर डक्ट बनने के बाद नौ मील क्षेत्र में भूस्खलन से जुड़े जोखिम में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे मंडी-कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग पर मानसून के दौरान यातायात अधिक सुरक्षित रहेगा और बार-बार लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी। एनएचएआई संवेदनशील हिस्सों में स्थायी सुरक्षा परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान यातायात बाधित न हो।
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नौ मील में पुख्ता सुरक्षा कार्य योजना पर काम चल रहा है। भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यहां स्थायी समाधान के लिए कार्य किया जा रहा है। -वरुण चारी,
परियोजना निदेशक, पीआईयू मंडी, एनएचएआई
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वायर डक्ट यानी फ्लाईओवर बनने से पहाड़ी से आ रहे मलबे की समस्या होगी हल
विकास की बात
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मंडी-कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-3) के संवेदनशील नौ मील क्षेत्र में भूस्खलन की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। यहां 39 करोड़ रुपये की लागत से 160 मीटर लंबी थ्री-लेयर रिटेनिंग (सुरक्षा) दीवार का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही सड़क को चौड़ा करने की योजना भी है, जिससे इस हिस्से में यातायात अधिक सुरक्षित और सुचारु हो सकेगा।
इसके अलावा करीब 125 करोड़ रुपये की लागत से वायर डक्ट (गैलरी/फ्लाईओवरनुमा संरचना) बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद यह परियोजना नौ मील क्षेत्र में भूस्खलन से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकती है। नौ मील क्षेत्र हर साल मानसून के दौरान सबसे अधिक प्रभावित रहने वाले हिस्सों में शामिल है। बारिश के समय पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिरने के कारण कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग घंटों तक बंद करना पड़ता है। सुरक्षा के लिहाज से वाहनों को नियंत्रित तरीके से छोड़ा जाता है, जिससे लंबा जाम लग जाता है। बीते वर्षों में यहां कई बड़े भूस्खलन हो चुके हैं, जिनसे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी है।
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एनएचएआई की योजना के तहत बनने वाली थ्री-लेयर सुरक्षा दीवार पहाड़ी को मजबूती देगी और ढीली चट्टानों व मलबे को सड़क तक पहुंचने से रोकेगी। साथ ही सड़क चौड़ी होने से वाहनों की आवाजाही भी बेहतर होगी। निर्माण कार्य के लिए तकनीकी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं, प्रस्तावित वायर डक्ट परियोजना इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। फ्लाईओवरनुमा इस संरचना के बनने के बाद पहाड़ी से गिरने वाले मलबे का असर सड़क पर नहीं पड़ेगा और वाहन बिना बाधा गुजर सकेंगे। इससे मानसून के दौरान बार-बार राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। सुरक्षा दीवार और भविष्य में वायर डक्ट बनने के बाद नौ मील क्षेत्र में भूस्खलन से जुड़े जोखिम में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे मंडी-कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग पर मानसून के दौरान यातायात अधिक सुरक्षित रहेगा और बार-बार लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी। एनएचएआई संवेदनशील हिस्सों में स्थायी सुरक्षा परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान यातायात बाधित न हो।
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नौ मील में पुख्ता सुरक्षा कार्य योजना पर काम चल रहा है। भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यहां स्थायी समाधान के लिए कार्य किया जा रहा है। -वरुण चारी,
परियोजना निदेशक, पीआईयू मंडी, एनएचएआई