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Mandi News: रत्ती खड्ड में सीवरेज और जैविक अपशिष्ट से बढ़ा प्रदूषण
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मछलियों की मौत के बाद पानी के सैंपल की रिपोर्ट में खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। रत्ती खड्ड में हाल ही में हुई मछलियों की मौत के मामले में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार खड्ड में बिना उपचारित सीवरेज और जैविक अपशिष्ट पहुंचने से पानी की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई। मछलियों की मौत के संभावित कारणों में इसे भी प्रमुख वजह माना जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 12 और 13 जून को रत्ती खड्ड के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र किए थे। जांच में अपस्ट्रीम क्षेत्र का पानी सामान्य पाया गया, जबकि डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर कई गुना अधिक दर्ज किया गया।
डाउनस्ट्रीम क्षेत्र के नमूनों में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 70 और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) 160 दर्ज की गई। वहीं, डिस्चार्ज चैंबर से लिए गए नमूनों में सीओडी का स्तर 4400 तक पहुंच गया। इसके अलावा पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा भी निर्धारित मानकों से काफी अधिक पाई गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना उपचारित सीवरेज और अधिक जैविक भार (ऑर्गेनिक लोड) के कारण पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई, जिससे जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिला उद्योग केंद्र को पहले ही नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उद्योग विभाग ने अपने जवाब में सोक पिट की मरम्मत, जमा स्लज हटाने और चैंबर की सफाई सहित कई तात्कालिक सुधारात्मक कदम उठाने की जानकारी दी है।
बॉक्स
निरीक्षण के दौरान किसी भी चैंबर या टैंक से रिसाव अथवा गंदगी बहती हुई नहीं पाई गई। उद्योग विभाग ने अपने जवाब में सभी चैंबर और टैंकों की मरम्मत कराने की बात कही है।
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-विनय कुमार, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। रत्ती खड्ड में हाल ही में हुई मछलियों की मौत के मामले में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार खड्ड में बिना उपचारित सीवरेज और जैविक अपशिष्ट पहुंचने से पानी की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई। मछलियों की मौत के संभावित कारणों में इसे भी प्रमुख वजह माना जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 12 और 13 जून को रत्ती खड्ड के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र किए थे। जांच में अपस्ट्रीम क्षेत्र का पानी सामान्य पाया गया, जबकि डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर कई गुना अधिक दर्ज किया गया।
डाउनस्ट्रीम क्षेत्र के नमूनों में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 70 और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) 160 दर्ज की गई। वहीं, डिस्चार्ज चैंबर से लिए गए नमूनों में सीओडी का स्तर 4400 तक पहुंच गया। इसके अलावा पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा भी निर्धारित मानकों से काफी अधिक पाई गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना उपचारित सीवरेज और अधिक जैविक भार (ऑर्गेनिक लोड) के कारण पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई, जिससे जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिला उद्योग केंद्र को पहले ही नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उद्योग विभाग ने अपने जवाब में सोक पिट की मरम्मत, जमा स्लज हटाने और चैंबर की सफाई सहित कई तात्कालिक सुधारात्मक कदम उठाने की जानकारी दी है।
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निरीक्षण के दौरान किसी भी चैंबर या टैंक से रिसाव अथवा गंदगी बहती हुई नहीं पाई गई। उद्योग विभाग ने अपने जवाब में सभी चैंबर और टैंकों की मरम्मत कराने की बात कही है।
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-विनय कुमार, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड