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Mandi News: कविताओं से सामाजिक कुरीतियों पर किया प्रहार
Mon, 17 Apr 2023 05:00 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Mon, 17 Apr 2023 05:00 PM IST
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सुंदरनगर में सुकेत साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद सुंदरनगर द्वारा आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी में
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। सुकेत साहित्यिक और सांस्कृतिक परिषद सुंदरनगर ने लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह परिसर में हिमाचल के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में साहित्यिक सम्मेलन का आयोजन किया। कार्यक्रम में कवियों और साहित्यकारों ने भाग लिया।
हास्य कवि रतन लाल शर्मा ने कहां गए वे दिन कविता सुनाई। सुरेंद्र मिश्रा ने हिमाचल दिवस पर कविता सुनाई। चर्चित कवि और बाल साहित्यकार पवन चौहान ने अरसा और काफल कविता सुनाई। कृष्ण चंद्र महादेविया ने लघुकथा तुगलक और जवाब सुनाई। नेहा ठाकुर ने हिमाचल प्रेम की कविता और सुनीता कुमारी ने प्रकृति प्रेम पर कविता पाठ किया। निशा कुमारी ने आज के हालात और मोना दत्ता ने सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करते हुए कविता पाठ किया।
इसके अलावा ईशा, भानु और पटियाल ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को प्रभावित किया। साहित्यिक आयोजन की अध्यक्षता करते हुए सुरेंद्र मिश्रा ने कहा कि इस तरह के आयोजन प्रतिवर्ष किए जाते रहने चाहिए। आस-पड़ोस के साहित्यकार देश समाज की भलाई के लिए कविताओं के माध्यम से आवाज उठाएं और व्यक्तिगत रूप में भी समाज में फैली कुरीतियों के समूल नाश के लिए बढ़चढ़ कर योगदान दें।
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सुंदरनगर (मंडी)। सुकेत साहित्यिक और सांस्कृतिक परिषद सुंदरनगर ने लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह परिसर में हिमाचल के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में साहित्यिक सम्मेलन का आयोजन किया। कार्यक्रम में कवियों और साहित्यकारों ने भाग लिया।
हास्य कवि रतन लाल शर्मा ने कहां गए वे दिन कविता सुनाई। सुरेंद्र मिश्रा ने हिमाचल दिवस पर कविता सुनाई। चर्चित कवि और बाल साहित्यकार पवन चौहान ने अरसा और काफल कविता सुनाई। कृष्ण चंद्र महादेविया ने लघुकथा तुगलक और जवाब सुनाई। नेहा ठाकुर ने हिमाचल प्रेम की कविता और सुनीता कुमारी ने प्रकृति प्रेम पर कविता पाठ किया। निशा कुमारी ने आज के हालात और मोना दत्ता ने सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करते हुए कविता पाठ किया।
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इसके अलावा ईशा, भानु और पटियाल ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को प्रभावित किया। साहित्यिक आयोजन की अध्यक्षता करते हुए सुरेंद्र मिश्रा ने कहा कि इस तरह के आयोजन प्रतिवर्ष किए जाते रहने चाहिए। आस-पड़ोस के साहित्यकार देश समाज की भलाई के लिए कविताओं के माध्यम से आवाज उठाएं और व्यक्तिगत रूप में भी समाज में फैली कुरीतियों के समूल नाश के लिए बढ़चढ़ कर योगदान दें।
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