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Mandi News: समय सीमा पार होने पर भूमि मालिकों की याचिकाएं खारिज
Fri, 12 Sep 2025 06:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Fri, 12 Sep 2025 06:59 AM IST
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मंडी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में विलंब माफी के लिए दायर याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पंचाट पुरस्कार को चुनौती देने की अधिकतम समयसीमा 90 दिन है, जिसे विशेष परिस्थिति में 30 दिन और बढ़ाया जा सकता है लेकिन इसके बाद कोई राहत नहीं दी जा सकती।
कुल्लू जिला के डोभी क्षेत्र की मीना शर्मा व पवना शर्मा, ओमप्रकाश, सुभाष चंद, सरोज कुमारी, दिलीप सिंह, माया देवी व अन्य ने 18 अक्तूबर 2023 को जारी पंचाट पुरस्कार को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। भूमि मालिकों ने दलील दी कि उन्हें पुरस्कार की प्रमाणित प्रति देर से मिली और परामर्श व दस्तावेज तैयार करने में समय लगा जिसके कारण आपत्तियां दाखिल करने में देरी हुई। पहले ये याचिकाएं जिला न्यायाधीश कुल्लू के समक्ष दाखिल की गई थीं लेकिन 9 दिसम्बर 2024 को क्षेत्राधिकार का सवाल उठने पर इन्हें मंडी अदालत में स्थानांतरित करना पड़ा।
एनएचएआई के पक्ष में अधिवक्ता ने दलील दी कि 17 फरवरी 2024 को पुरस्कार की प्रति मिल जाने के बावजूद याचिकाएं 29 मई 2024 को दाखिल की गईं जो तीन माह की समयसीमा से 13 दिन बाद थीं। अदालत ने माना कि याचिकाएं न केवल विलंबित हैं बल्कि 120 दिनों की अधिकतम सीमा से भी परे चली गई हैं। इसी आधार पर अदालत ने सभी याचिकाएंं खारिज कर दी।
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कुल्लू जिला के डोभी क्षेत्र की मीना शर्मा व पवना शर्मा, ओमप्रकाश, सुभाष चंद, सरोज कुमारी, दिलीप सिंह, माया देवी व अन्य ने 18 अक्तूबर 2023 को जारी पंचाट पुरस्कार को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। भूमि मालिकों ने दलील दी कि उन्हें पुरस्कार की प्रमाणित प्रति देर से मिली और परामर्श व दस्तावेज तैयार करने में समय लगा जिसके कारण आपत्तियां दाखिल करने में देरी हुई। पहले ये याचिकाएं जिला न्यायाधीश कुल्लू के समक्ष दाखिल की गई थीं लेकिन 9 दिसम्बर 2024 को क्षेत्राधिकार का सवाल उठने पर इन्हें मंडी अदालत में स्थानांतरित करना पड़ा।
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एनएचएआई के पक्ष में अधिवक्ता ने दलील दी कि 17 फरवरी 2024 को पुरस्कार की प्रति मिल जाने के बावजूद याचिकाएं 29 मई 2024 को दाखिल की गईं जो तीन माह की समयसीमा से 13 दिन बाद थीं। अदालत ने माना कि याचिकाएं न केवल विलंबित हैं बल्कि 120 दिनों की अधिकतम सीमा से भी परे चली गई हैं। इसी आधार पर अदालत ने सभी याचिकाएंं खारिज कर दी।
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