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Mandi News: एफसीए के लंबित मामले जल्द निपटाएं अधिकारी
Thu, 16 Jan 2025 12:23 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 16 Jan 2025 12:23 AM IST
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मंडी में एफसीए मामलों की समीक्षा बैठक में अधिकरियों से चर्चा करते उपायुक्त अपूर्व देवगन। स्त्र
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने के अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी से कार्य न करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली को उनके उच्च अधिकारियों से अवगत करवाया जाएगा। वे बुधवार को एफसीए के तहत लंबित फॉरेस्ट क्लीयरेंस के 81 मामलों की समीक्षा बैठक में बोल रहे थे।
वन वृत्त मंडी में 2022 से लेकर अब तक परिवेश 2.0 में 19 मामले, 2012 से लेकर 2022 तक के परिवेश 1.0 में 53 मामले और कोर्ट परिसरों के निर्माण के 9 मामले फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए दर्ज हैं। उपायुक्त ने बैठक में एफसीए के लंबित मामलों की यूजर एजेंसियों के साथ एक-एक मामले की समीक्षा की और मामला लंबित होने के कारणों की पूरी जानकारी ली। उपायुक्त ने इस अवसर पर बताया कि मंडी वन वृत में पिछले एक वर्ष के दौरान एफआरए के 132 मामलों में से 121 मामलों को स्वीकृत कर दिया है। एफआरए के अधिकतर मामले लोक निर्माण, जल शक्ति, शिक्षा और ग्रामीण विकास विभाग के संबंधित थे। एक हेक्टेयर से कम वन भूमि के मामलों को एफआरए के तहत लाकर इनका निपटारा वृत स्तर पर ही कर दिया जाता है।
एक हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के मामलों को केंद्र सरकार को एफसीए केस बनाकर पर्यावरण मंजूरी के लिए भेजा जाता है। डीएफओ (जिला मुख्यालय) अंबरीश शर्मा ने बैठक का संचालन किया। बैठक में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट सिद्धार्थ सरपाल, एडीएम डॉ मदन कुमार, डीएफओ मंडी वासु डोगर और नाचन एसएस कश्यप व अन्य मौजूद रहे।
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मंडी। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने के अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी से कार्य न करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली को उनके उच्च अधिकारियों से अवगत करवाया जाएगा। वे बुधवार को एफसीए के तहत लंबित फॉरेस्ट क्लीयरेंस के 81 मामलों की समीक्षा बैठक में बोल रहे थे।
वन वृत्त मंडी में 2022 से लेकर अब तक परिवेश 2.0 में 19 मामले, 2012 से लेकर 2022 तक के परिवेश 1.0 में 53 मामले और कोर्ट परिसरों के निर्माण के 9 मामले फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए दर्ज हैं। उपायुक्त ने बैठक में एफसीए के लंबित मामलों की यूजर एजेंसियों के साथ एक-एक मामले की समीक्षा की और मामला लंबित होने के कारणों की पूरी जानकारी ली। उपायुक्त ने इस अवसर पर बताया कि मंडी वन वृत में पिछले एक वर्ष के दौरान एफआरए के 132 मामलों में से 121 मामलों को स्वीकृत कर दिया है। एफआरए के अधिकतर मामले लोक निर्माण, जल शक्ति, शिक्षा और ग्रामीण विकास विभाग के संबंधित थे। एक हेक्टेयर से कम वन भूमि के मामलों को एफआरए के तहत लाकर इनका निपटारा वृत स्तर पर ही कर दिया जाता है।
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एक हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के मामलों को केंद्र सरकार को एफसीए केस बनाकर पर्यावरण मंजूरी के लिए भेजा जाता है। डीएफओ (जिला मुख्यालय) अंबरीश शर्मा ने बैठक का संचालन किया। बैठक में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट सिद्धार्थ सरपाल, एडीएम डॉ मदन कुमार, डीएफओ मंडी वासु डोगर और नाचन एसएस कश्यप व अन्य मौजूद रहे।
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