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अब फ्रासबीन के घटे दाम, 20 रुपये प्रति किलो मिल रहे
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करसोग स्थित चुराग सब्जी मंडी में पहुंची फ्रासबीन की खेप। दाम कम मिलने से किसान मायूस हैं।
- फोटो : Mandi
करसोग (मंडी)। सब्जी मंडियों में अब फ्रासबीन के दाम भी गिर गए हैं। 750 रुपये प्रति किलो बीज खरीदने के बाद किसानों को फ्रासबीन के दाम 20 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। मंडियों में फ्रासबीन के दाम अच्छे न मिलने से हजारों किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं।
करसोग में खरीफ सीजन में फ्रासबीन प्रमुख नकदी फसल है। किसानों ने 750 रुपये प्रति किलो बीज खरीद कर फ्रासबीन की बिजाई की थी। अब फसल मंडियों में सप्ताहभर से 14 से 20 रुपये किलो बिक रही है। इससे किसानों को फसल पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
उपमंडल में किसानों ने फसल बिजाई के लिए खेत तैयार करने, बीज, खाद सहित कीटनाशक दवा आदि के लिए बैंकों से ऋण लिया है। अब अच्छे दाम न मिलने से किसानों को किस्त निकालनी भी मुश्किल हो गई है। सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का दावा कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि जब बीज और दवाइयों की कीमत लगातार बढ़ रही है लेकिन फसल के अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं तो आय कैसे दोगुनी होगी।
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किसानों का कहना है कि अगर सरकार सच में किसानों का फायदा चाहती है तो सब्जियों का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाना चाहिए ताकि किसान भी बेहतर जिंदगी जी सकें। किसान युवराज शर्मा ने कहा कि 750 रुपये प्रतिकिलो बीज खरीदा। खाद और दवाइयों पर भी खर्च किया। अब फ्रासबीन के दाम बेहतर न मिलने से आय कैसे दोगुनी हो पाएगी। कहा कि सरकार को इस बारे में कुछ सोचना चाहिए।
प्रदेश आढ़ती संघ के प्रधान नाहर सिंह चौधरी का कहना है कि जिन बड़ी मंडियों में हिमाचल से फ्रासबीन भेजी जाती है, उनमें अभी लोकल फ्रासबीन चल रही है।
इस वजह से दाम कम हैं। एक से डेढ़ सप्ताह में बाहरी राज्य में फ्रासबीन खत्म हो जाएगी, इसके बाद दाम बढ़ सकते हैं। औसतन साठ रुपये प्रति किलो तक फ्रासबीन के दाम रहते हैं।
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करसोग में खरीफ सीजन में फ्रासबीन प्रमुख नकदी फसल है। किसानों ने 750 रुपये प्रति किलो बीज खरीद कर फ्रासबीन की बिजाई की थी। अब फसल मंडियों में सप्ताहभर से 14 से 20 रुपये किलो बिक रही है। इससे किसानों को फसल पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
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उपमंडल में किसानों ने फसल बिजाई के लिए खेत तैयार करने, बीज, खाद सहित कीटनाशक दवा आदि के लिए बैंकों से ऋण लिया है। अब अच्छे दाम न मिलने से किसानों को किस्त निकालनी भी मुश्किल हो गई है। सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का दावा कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि जब बीज और दवाइयों की कीमत लगातार बढ़ रही है लेकिन फसल के अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं तो आय कैसे दोगुनी होगी।
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किसानों का कहना है कि अगर सरकार सच में किसानों का फायदा चाहती है तो सब्जियों का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाना चाहिए ताकि किसान भी बेहतर जिंदगी जी सकें। किसान युवराज शर्मा ने कहा कि 750 रुपये प्रतिकिलो बीज खरीदा। खाद और दवाइयों पर भी खर्च किया। अब फ्रासबीन के दाम बेहतर न मिलने से आय कैसे दोगुनी हो पाएगी। कहा कि सरकार को इस बारे में कुछ सोचना चाहिए।
प्रदेश आढ़ती संघ के प्रधान नाहर सिंह चौधरी का कहना है कि जिन बड़ी मंडियों में हिमाचल से फ्रासबीन भेजी जाती है, उनमें अभी लोकल फ्रासबीन चल रही है।
इस वजह से दाम कम हैं। एक से डेढ़ सप्ताह में बाहरी राज्य में फ्रासबीन खत्म हो जाएगी, इसके बाद दाम बढ़ सकते हैं। औसतन साठ रुपये प्रति किलो तक फ्रासबीन के दाम रहते हैं।
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