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नेरचौक मेडिकल कॉलेज की कैंटीन बंद
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नेरचौक मेडिकल कॉलेज की बंद पड़ी कैंटीन।
- फोटो : Mandi
मंडी। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक की कैंटीन बंद हो गई है। इससे प्रशिक्षु डॉक्टरों, नर्सों, तीमारदारों और स्टाफ को बहुत परेशानी हो रही है। जरूरी खाद्य सामग्री के लिए कैंपस से बाहर नेरचौक बाजार जाना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कैंटीन का टेंडर कर दिया गया है। महज एक ने ही टेंडर भरा है। कम से कम तीन का टेंडर भरना जरूरी है, तभी कैंटीन का आवंटन किया जा सकता है। स्टाफ और तीमारदारों को जूस, चाय, खाना और अन्य खाद्य एवं पेय सामग्री खरीदने में परेशानी हो रही है। अस्पताल में रोजाना 1,000 से 1,100 की ओपीडी होती है। इससे स्टाफ, प्रशिक्षु डॉक्टर, नर्सों और मरीजों-तीमारदारों को कैंटीन बंद होने से कठिनाई हो रही है।
मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीएल वर्मा ने कहा कि कैंटीन का टेंडर किया गया है। एक ही व्यक्ति ने आवेदन किया है। अगर जरूरत पड़ी तो नया टेंडर किया जाएगा। नाचन क्षेत्र के महंत राम ने बताया कि उनके एक रिश्तेदार यहां पर दाखिल थे तो उन्हें भी यहीं रुकना पड़ा।
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इस दौरान उन्हें खाने पीने के लिए बाजार ही जाना पड़ा। उधर बिलासपुर के प्रेम सिंह ने कहा कि उनकी बहन अस्पताल में दाखिल थी। मरीज को तो खाना अंदर से ही मिल जाता था, मगर अन्य तीमारदारों के लिए खाना बाहर से महंगे दामों पर मंगवाना पड़ा। संवाद
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अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कैंटीन का टेंडर कर दिया गया है। महज एक ने ही टेंडर भरा है। कम से कम तीन का टेंडर भरना जरूरी है, तभी कैंटीन का आवंटन किया जा सकता है। स्टाफ और तीमारदारों को जूस, चाय, खाना और अन्य खाद्य एवं पेय सामग्री खरीदने में परेशानी हो रही है। अस्पताल में रोजाना 1,000 से 1,100 की ओपीडी होती है। इससे स्टाफ, प्रशिक्षु डॉक्टर, नर्सों और मरीजों-तीमारदारों को कैंटीन बंद होने से कठिनाई हो रही है।
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मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीएल वर्मा ने कहा कि कैंटीन का टेंडर किया गया है। एक ही व्यक्ति ने आवेदन किया है। अगर जरूरत पड़ी तो नया टेंडर किया जाएगा। नाचन क्षेत्र के महंत राम ने बताया कि उनके एक रिश्तेदार यहां पर दाखिल थे तो उन्हें भी यहीं रुकना पड़ा।
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इस दौरान उन्हें खाने पीने के लिए बाजार ही जाना पड़ा। उधर बिलासपुर के प्रेम सिंह ने कहा कि उनकी बहन अस्पताल में दाखिल थी। मरीज को तो खाना अंदर से ही मिल जाता था, मगर अन्य तीमारदारों के लिए खाना बाहर से महंगे दामों पर मंगवाना पड़ा। संवाद