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फोरलेन निर्माण में एनजीटी के नियम ताक पर

Sat, 14 Sep 2019 10:30 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2019 10:30 PM IST
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negligence
औट के पास सागली मोड़ पर फोरलेन निर्माण में लगी एफ्कोन कंपनी की अोर से नियम की धजिज्यां उड़ाते हुए ? - फोटो : Mandi
नगवाईं (मंडी)। चंडीगढ़-मनाली फोरलेन के निर्माण में एनजीटी के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। औट के पास सरकार और प्रशासन से बेखौफ फोरलेन बनाने में लगी कंपनी जीवनदायनी ब्यास नदी में सड़क का मलबा फेंक रही हैं। नदी किनारे मिट्टी के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। पहले ही अंधाधुंध और अवैज्ञानिक कटान के चलते प्रदूषण से नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। बारिशें में तटीय क्षेत्रों में भारी जानमाल का नुकसान हो रहा है।
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सरकार ब्यास नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए कड़े कदम उठा रही है लेकिन प्रशासन और अफसरशाही के नर्म रवैये के कारण निर्माण में लगी कंपनियां ब्यास में बेझिझक मलबा फेंककर सरकार की ब्यास नदी को बचाने की तमाम कोशिशों पर पानी फेर रही हैं। शनिवार को औट के पास सागली मोड़ पर एफ्कान कंपनी की ओर से नियम की धज्जियां उड़ाते हुए नदी में मलबा फेंका गया। इस पर कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जाहिर की। रोष जताते हुए कुछ ने वीडियो और फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया। इसे लेकर निर्माण में लगी कंपनियों की खूब किरकिरी हो रही है। उधर, कंपनी के अधिकारी बलजिंद्र गौरेय्या ने किसी भी टिप्पणी से इंकार कर दिया है।
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औट से नगवाईं तक नियमों की अवहेलना
औट से नगवाईं तक भारी मशीनरी तैनात है। फोरलेन बनाने के लिए पहाड़ों का सीना छलनी किया जा रहा है। कटिंग में हजारों टन मलबा निकाला जा रहा है लेकिन इसे प्रशासन की नाक के तले सीधे ब्यास में बहाया जा रहा है। हालांकि, डंपिंग साइट्स भी बनी हैं लेकिन चंद पैसे बचाने के चक्कर में मलबा सीधे नदी में फेंका जा रहा है। मलबा फेंकने का दृश्य रोज देखने को मिल रहा है। लेकिन प्रशासन, विभाग और पर्यावरण इस मुद्दे पर खामोश है।
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मानसून में ब्यास मचा चुकी है तबाही
पर्यावरण से छेड़छाड़ कितनी घातक है, इसका उदाहरण बीते दिनों ब्यास नदी में आई बाढ़ दे चुकी है। हाल ही में आई बाढ़ के कारण कई वाहन बह गए। घरों को नुकसान पहुंचा। मंडी शहर में भी ब्वास ने भारी तबाही मचाई। ऐतिहासिक विक्टोरिया पुल से पानी का फासला कुछ दूर तक रहा। पंडोह और मंडी में पानी घुसने से काफी नुकसान हुआ। ऐसे में ब्यास में मक की डंपिंग दुर्भाग्यपूर्ण है जो आने बाले समय के लिए खतरे की घंटी है।
एनजीटी से होगी शिकायत
पर्यावरणविद किशन लाल का कहना है कि ब्यास में डंपिंग करना दुर्भाग्यपूर्ण है। ब्यास अधिक प्रदूषित हो रही है। आने वाले समय में इसके भयंकर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से कंपनी पर शिकंजा कसने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि इसकी शिकायत प्रशासन के अलावा एनजीटी को की जाएगी और जरूरत पड़ी तो मौके पर काम बंद किया जाएगा।

मलबा फेंकने की होगी जांच: डीसी
डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि पहले भी इस तरह की शिकायतें पहुंची हैं। कंपनी पर पहले भी पैनेल्टी लगाई गई है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों को इस संदर्भ में उचित जांच करने के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।
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