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मुरहा हाइडल प्रोजेक्ट का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
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गोहर (मंडी)। सीएम की गृह पंचायत मुरहाग पंचायत में विवादित हाइडल प्रोजेक्ट का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। प्रशासन से ग्रामीणों और हाइडल प्रोजेक्ट प्रबंधन के बीच पनपे विवाद के न सुलझने के बाद हाइडल पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
मुरहाग के सुराह गांव में पावर प्रोजेक्ट कंपनी ने काम शुरू किया है। प्रबंधन का दावा है कि औपचारिकताएं पूरी कर पावर प्रोजेक्ट का काम शुरू किया था। इसका ग्रामीण विरोध करते रहे। ग्रामीण इस संबंध में सीएम, डीसी, एसपी और एसडीएम थुनाग से भी मिले। इसके बावजूद प्रशासन से स्थायी समाधान न निकलने से कंपनी प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है।
कंपनी के एमडी आशीष गुप्ता ने बताया कि हाइडल प्रोजेक्ट लगाने संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ग्रामीण बेवजह पावर प्रोजेक्ट निर्माण में रोड़ा अटका रहे हैं। इससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। इसकी वजह से कंपनी को हाईकोर्ट जाना पड़ा है। बताया जा रहा है कि कंपनी ने सरकार समेत प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय पंचायत अधिकारी को पार्टी बनाया है।
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एसडीएम थुनाग पारस अग्रवाल ने बताया कि कंपनी प्रबंधन ने मांगें रखी थी। इसके संबंध में जवाब तैयार कर हाईकोर्ट में फाइल किया जा रहा है। इस मामले को लेकर 25 नवंबर को उपायुक्त मंडी ने इन्क्वायरी बिठाई थी। इसको लेकर 10 दिन में जवाब मांगा था और एसडीएम ने 17 जनवरी को निपटारा किया।
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मुरहाग के सुराह गांव में पावर प्रोजेक्ट कंपनी ने काम शुरू किया है। प्रबंधन का दावा है कि औपचारिकताएं पूरी कर पावर प्रोजेक्ट का काम शुरू किया था। इसका ग्रामीण विरोध करते रहे। ग्रामीण इस संबंध में सीएम, डीसी, एसपी और एसडीएम थुनाग से भी मिले। इसके बावजूद प्रशासन से स्थायी समाधान न निकलने से कंपनी प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है।
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कंपनी के एमडी आशीष गुप्ता ने बताया कि हाइडल प्रोजेक्ट लगाने संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ग्रामीण बेवजह पावर प्रोजेक्ट निर्माण में रोड़ा अटका रहे हैं। इससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। इसकी वजह से कंपनी को हाईकोर्ट जाना पड़ा है। बताया जा रहा है कि कंपनी ने सरकार समेत प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय पंचायत अधिकारी को पार्टी बनाया है।
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एसडीएम थुनाग पारस अग्रवाल ने बताया कि कंपनी प्रबंधन ने मांगें रखी थी। इसके संबंध में जवाब तैयार कर हाईकोर्ट में फाइल किया जा रहा है। इस मामले को लेकर 25 नवंबर को उपायुक्त मंडी ने इन्क्वायरी बिठाई थी। इसको लेकर 10 दिन में जवाब मांगा था और एसडीएम ने 17 जनवरी को निपटारा किया।