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नगर निगम मंडी : पदवी और व्यवस्था बदली, चार साल में नहीं बदले हालात

Mon, 28 Oct 2024 10:07 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Mon, 28 Oct 2024 10:07 AM IST
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Municipal Corporation Mandi: Title and system changed, situation has not changed in four years
पड्डल वार्ड स्थित एसपीयू के कन्या मांडव होस्टल के पास खस्ताहाल रास्ता। -संवाद
मंडी। नगर परिषद से 28 अक्तूबर 2020 को नगर निगम में बदले मंडी में चार साल बाद भी कोई खास बदलाव नहीं हुआ। नगर निगम बनने के बाद यहां थोड़ी व्यवस्था बदली और अधिकारियों के पदों में विस्तार हुआ। नगर परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की पदवी बदलने के बाद अब यहां महापौर और उप महापौर व ईओ की जगह आयुक्त व्यवस्था संभाल रहे हैं।
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मगर विकास सहित अन्य कार्यों के लिए आवश्यक टाउन प्लानर, लॉ ऑफिसर, हेल्थ ऑफिसर समेत 116 महत्वपूर्ण पद अभी भी खाली हैं। इससे शहर में कई विकास परियोजनाएं धीमी रफ्तार से चल रही हैं। नगर निगम के वार्डों में सड़कों और संपर्क मार्गों की हालत खस्ता है और हाईवे के किनारे नालियां गंदगी से भरी पड़ी हैं।
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28 अक्तूबर 2020 में नगर निगम की अधिसूचना जारी हुई तो लोगों को लगा कि छोटी काशी के अच्छे दिन आने वाले हैं। मगर चार बीत जाने के बाद भी पदवी के अलावा कुछ नहीं बदल सका है। हालांकि सफाई के लिए व्यवस्था परिवर्तन हुआ है अब घर-घर से कूड़ा उठाया जा रहा है।स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था कुछ हद तक सुधार हुआ है, लेकिन कई वार्डों में स्थिति जस की तस है।
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नगर निगम बनने के चार साल बाद भी लोगों को ऑनलाइन सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। निगम चार साल में शहर के लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट भी नहीं ला पाया है। हालांकि महिला सशक्तीकरण को लेकर किए गए कार्यों को लेकर निजी संस्थान की ओर से स्कॉच अवॉर्ड दिया गया है।

विकास कार्यों के लिए कब-कब कितना रहा प्रस्तावित बजट
2021-22 में 87.67 करोड़
2022-23 में 43.61 करोड़
2023-24 में 74.52 करोड़
2024-25 में 75.26 करोड़



निगम क्षेत्र से बाहर हो दोहंधी : बीके कौंडल
सेवानिवृत्त अधिकारी बीके कौंडल ने कहा कि पिछले चार साल में दोहंधी वार्ड में कुछ खास काम नहीं हुआ है। पार्षद के एरिया में कुछ जगह रास्ते बने है। फोरलेन साइड कुछ काम नहीं हुआ है। नालियां गंदगी से भरी हैं। लोगों पर आने वाले दिनों में टैक्स के ही बोझ बढ़ेंगे। ऐसे में दोहंधी को नगर निगम से बाहर निकाल देना चाहिए।

वार्डों में किया एलईडी घोटाला : आकाश
वार्ड-7 निवासी अधिवक्ता आकाश शर्मा ने कहा कि निगम से अच्छा नगर परिषद था। चार साल पहले सड़कें, रास्ते, सीवरेज आदि व्यवस्था सही थी। सरकार ने सजबाग दिखाकर निगम बनाया और 16 करोड़ रुपये का ऐलान किया। मगर आज तक पैसा नहीं दिया। बावड़ियों के कार्य अधर में लटके हैं। सड़कों पर आवारा पशु हैं। ग्रामीण वार्डों में छोटी एलईडी लगाकर घोटाला किया गया है।
सफाई व्यवस्था में पहले से सुधार : मृदुला


टारना निवासी मृदुला शर्मा ने कहा कि पहले से सफाई व्यवस्था काफी सुधरी है। पहले हर कहीं कूड़ा नजर आता था। मगर अब ऐसा नहीं है। वार्डों खासकर टारना में रास्तों की हालत खस्ता है। स्ट्रीट लाइटों की संख्या बढ़ी है। अगले एक साल के दौरान निगम को वार्डों में खराब रास्तों की हालत सुधारने पर जोर देना चाहिए। आपदा प्रभावित लोगों के घरों के आसपास भी डंगे लगाए जाने चाहिए।


सड़कें और रास्ते खस्ताहाल : सुभाष पॉल
खलियार निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी सुभाष पॉल ने कहा कि नगर निगम बनने के बाद भी शहर में कुछ ऐसा महसूस नहीं होता है कि कोई बदलाव हुआ है। सफाई पहले से बेहतर हुई है, लेकिन अन्य कार्यों में निगम असफल रहा। शहर में कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं लगा। सड़कों और रास्तों की हालत खस्ता है। पार्क बनने चाहिए थे, लेकिन जो वार्डों में पार्क बने हैं, उनकी भी देखरेख नहीं हो रही है।



शहर को लेकर काफी योजनाएं बनाई गई हैं। मगर सरकार से ग्रांट न मिलने की वजह से उनमें देरी हो रही है। पैसों के बिना विकास कार्यों को अंजाम देना मुश्किल है। निगम की इतनी आय नहीं है कि वह बड़े कार्यों को करवा सके। अगर ग्रांट आती हैं तो शहर में विकास को गति दी जाएगी। निगम में स्टाफ भरने को लेकर मामला शहरी मंत्री के ध्यान में भी लाया गया है।
-वीरेंद्र भट्ट, महापौर, नगर निगम मंडी
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