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Mandi News: कंजक पूजन के लिए नहीं मिलीं मट्ठियां, देरी से खोलने पड़े व्रत
Sat, 12 Oct 2024 05:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sat, 12 Oct 2024 05:00 AM IST
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मंडी। शारदीय नवरात्र में नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्रि पर्व का समापन होता है। अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का विधान है। माना जाता है कि कन्या पूजन से माता रानी प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा बरसाती हैं। मगर मंडी जिले में शुक्रवार को कई श्रद्धालुओं को कंजक पूजन के लिए छोटी बेटियों (मंडियाली बोली में मट्ठियों) की इधर-इधर तलाश करनी पड़ी।
आस पड़ोस के लोग अपनी बच्चियों को दूसरों के घर भेजने में संकोच कर रहे थे। ऐसे में कई लोगों ने प्रवासी बच्चियों को घर बुलाकर कंजक पूजन किया। मंडी शहर के सुहड़ा वार्ड की सुनीता, जेल रोड से रक्षा, खलियार की सावित्री, पुरानी मंडी से सौम्या आदि ने बताया कि इस बार दुर्गा अष्टमी और नौवीं एक साथ होने के कारण सुबह से ही कंजक पूजन के लिए बच्चियों की तलाश करनी पड़ी। इस कारण देरी से व्रत तोड़ना पड़ा। आस-पड़ोस और रिश्तेदारी में छोटी बच्चियां है, लेकिन लोग उन्हें भेजने में संकोच करते हैं। मुश्किल से साढ़े 12 बजे प्रवासी बच्चियों को लाकर कंजक पूजन कर व्रत का उद्यापन किया।
13 साल में घटी बच्चियों की संख्या
क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के अनुसार, वर्तमान में जिले में 1000 लड़कों पर 930 लड़कियों का जन्म हो रहा है, जबकि 2011 की जनगणना के अनुसार यह आंकड़ा 1000 लड़कों पर 1013 लड़कियों का था। पिछले 13 सालों में लिंगानुपात में गिरावट आई है, जो चिंता का विषय है। प्रशासन भी इस स्थिति को सुधारने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है।
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सिद्धकाली मंदिर में 2100 दीये जलाए
अष्टमी के दिन जिले भर में कंजक पूजन के साथ नवरात्रि पर्व का समापन हुआ। शहर के सिद्धकाली, भीमाकाली, श्यामाकाली टारना, महाकाली पुरानी, शीतला मंदिर और बज्रेश्वरी मंदिर सहित अन्य प्रतिष्ठित मंदिरों में कंजक पूजन किया गया। सिद्धकाली मंदिर के पुजारी जगदीश ने बताया कि वीरवार रात को 2100 दीये जलाए गए थे और शुक्रवार को दुर्गा पाठ की पूर्णाहुति के साथ हवन संपन्न हुआ।
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आस पड़ोस के लोग अपनी बच्चियों को दूसरों के घर भेजने में संकोच कर रहे थे। ऐसे में कई लोगों ने प्रवासी बच्चियों को घर बुलाकर कंजक पूजन किया। मंडी शहर के सुहड़ा वार्ड की सुनीता, जेल रोड से रक्षा, खलियार की सावित्री, पुरानी मंडी से सौम्या आदि ने बताया कि इस बार दुर्गा अष्टमी और नौवीं एक साथ होने के कारण सुबह से ही कंजक पूजन के लिए बच्चियों की तलाश करनी पड़ी। इस कारण देरी से व्रत तोड़ना पड़ा। आस-पड़ोस और रिश्तेदारी में छोटी बच्चियां है, लेकिन लोग उन्हें भेजने में संकोच करते हैं। मुश्किल से साढ़े 12 बजे प्रवासी बच्चियों को लाकर कंजक पूजन कर व्रत का उद्यापन किया।
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13 साल में घटी बच्चियों की संख्या
क्षेत्रीय अस्पताल मंडी के अनुसार, वर्तमान में जिले में 1000 लड़कों पर 930 लड़कियों का जन्म हो रहा है, जबकि 2011 की जनगणना के अनुसार यह आंकड़ा 1000 लड़कों पर 1013 लड़कियों का था। पिछले 13 सालों में लिंगानुपात में गिरावट आई है, जो चिंता का विषय है। प्रशासन भी इस स्थिति को सुधारने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है।
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सिद्धकाली मंदिर में 2100 दीये जलाए
अष्टमी के दिन जिले भर में कंजक पूजन के साथ नवरात्रि पर्व का समापन हुआ। शहर के सिद्धकाली, भीमाकाली, श्यामाकाली टारना, महाकाली पुरानी, शीतला मंदिर और बज्रेश्वरी मंदिर सहित अन्य प्रतिष्ठित मंदिरों में कंजक पूजन किया गया। सिद्धकाली मंदिर के पुजारी जगदीश ने बताया कि वीरवार रात को 2100 दीये जलाए गए थे और शुक्रवार को दुर्गा पाठ की पूर्णाहुति के साथ हवन संपन्न हुआ।