{"_id":"62fbd85f4f5b4f08405548fe","slug":"mandi-news-himachal-news-poetry-lesson-on-75-steps-of-hindi-literature-mandi-news-sml4185451150","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदी साहित्य के 75 पग पर काव्य पाठ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदी साहित्य के 75 पग पर काव्य पाठ
विज्ञापन
मंडी। 75वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में उत्थान फाउंडेशन ने अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया। मंडी जिले के संधोल से संबंध रखने वाली सह आयोजक तरुण घवाना ने बताया कि वेबिनार में स्वतंत्रोत्तर हिंदी साहित्य के 75 पग विषय पर चर्चा एवं काव्य पाठ हुआ।
खास बात यह थी कि इसमें प्रवासी भारतीयों के अलावा विदेशी गैर हिंदी मेहमानों ने भी अपने वक्तव्य दिए। भारत से इतर 13 देशों के वक्ताओं ने वेबिनार में भाग लिया। उत्थान फाउंडेशन की संचालिका संधोल निवासी अरुणा घवाना ने वेबिनार की शुरुआत कर चर्चा के विषय को सबके सामने प्रस्तुत किया।
अरुणा घवाना ने स्वतंत्रोत्तर साहित्य में पर्यावरण साहित्य के महत्व पर अपना पक्ष रखा। वेबिनार की मुख्य अतिथि ताशकंद सरकारी प्राच्य विद्या संस्थान की प्रोफेसर उल्फत मुखीबोवा थीं। उन्होंने 21वीं सदी में भक्ति साहित्य के महत्व पर पक्ष रखा।
विज्ञापन
कहा कि भारत का साहित्य संपूर्ण विश्व के लिए एक मार्गदर्शक है। यूके से अतिथि वक्ता साहित्यकार एवं संपादिका शैल अग्रवाल ने स्वतंत्रोत्तर हिंदी साहित्य की कहानियों का खूबसूरत विश्लेषण किया। कनाडा से डॉ. स्नेह ठाकुर ने उपन्यास विधा पर अपना वक्तव्य दिया। न्यूजीलैंड से मैसी यूनिवर्सिटी की निदेशक डॉ. पुष्पा वुड ने काव्य पाठ किया।
दक्षिण अफ्रीका से हिंदी शिक्षा संघ दक्षिण अफ्रीका की पूर्व अध्यक्ष डॉ. उषा देवी शुक्ला ने भारत का 76वां स्वतंत्रता दिवस एक दक्षिण अफ्रीकी प्रवासी संतान के तौर पर अपने विचार प्रस्तुत किए। स्वीडन से इंडो-स्कैंडिक संस्थान के उपाध्यक्ष और स्टॉकहोम में हिंदू मंदिर के संस्थापक सदस्य सुरेश पांडेय, नार्वे से गुरू शर्मा, मॉरीशस से कवि शंभू धनराज, सूरीनाम से हिंदी शिक्षिका लैला लालाराम, त्रिनिडाड-टुबैगो से रुकमणि होल्लास और नीदरलैंड से हिंदी शिक्षिका कृष्ण कुमारी जरबंधन ने काव्य पाठ किया।
फीजी से फीजी सरकार के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. बलराम पंडित ने स्वतंत्रोत्तर साहित्य में मनोविज्ञान पर चर्चा की। दक्षिण कोरिया से अजय निबांकर ने भारत के तकनीकी सोपानों को काव्यबद्ध किया।
000
विज्ञापन
खास बात यह थी कि इसमें प्रवासी भारतीयों के अलावा विदेशी गैर हिंदी मेहमानों ने भी अपने वक्तव्य दिए। भारत से इतर 13 देशों के वक्ताओं ने वेबिनार में भाग लिया। उत्थान फाउंडेशन की संचालिका संधोल निवासी अरुणा घवाना ने वेबिनार की शुरुआत कर चर्चा के विषय को सबके सामने प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
अरुणा घवाना ने स्वतंत्रोत्तर साहित्य में पर्यावरण साहित्य के महत्व पर अपना पक्ष रखा। वेबिनार की मुख्य अतिथि ताशकंद सरकारी प्राच्य विद्या संस्थान की प्रोफेसर उल्फत मुखीबोवा थीं। उन्होंने 21वीं सदी में भक्ति साहित्य के महत्व पर पक्ष रखा।
विज्ञापन
कहा कि भारत का साहित्य संपूर्ण विश्व के लिए एक मार्गदर्शक है। यूके से अतिथि वक्ता साहित्यकार एवं संपादिका शैल अग्रवाल ने स्वतंत्रोत्तर हिंदी साहित्य की कहानियों का खूबसूरत विश्लेषण किया। कनाडा से डॉ. स्नेह ठाकुर ने उपन्यास विधा पर अपना वक्तव्य दिया। न्यूजीलैंड से मैसी यूनिवर्सिटी की निदेशक डॉ. पुष्पा वुड ने काव्य पाठ किया।
दक्षिण अफ्रीका से हिंदी शिक्षा संघ दक्षिण अफ्रीका की पूर्व अध्यक्ष डॉ. उषा देवी शुक्ला ने भारत का 76वां स्वतंत्रता दिवस एक दक्षिण अफ्रीकी प्रवासी संतान के तौर पर अपने विचार प्रस्तुत किए। स्वीडन से इंडो-स्कैंडिक संस्थान के उपाध्यक्ष और स्टॉकहोम में हिंदू मंदिर के संस्थापक सदस्य सुरेश पांडेय, नार्वे से गुरू शर्मा, मॉरीशस से कवि शंभू धनराज, सूरीनाम से हिंदी शिक्षिका लैला लालाराम, त्रिनिडाड-टुबैगो से रुकमणि होल्लास और नीदरलैंड से हिंदी शिक्षिका कृष्ण कुमारी जरबंधन ने काव्य पाठ किया।
फीजी से फीजी सरकार के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. बलराम पंडित ने स्वतंत्रोत्तर साहित्य में मनोविज्ञान पर चर्चा की। दक्षिण कोरिया से अजय निबांकर ने भारत के तकनीकी सोपानों को काव्यबद्ध किया।
000