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कुथाह मेले के शुभारंभ पर निकली भव्य जलेब
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सराज घाटी के जंजैहली में ऐतिहासिक कुथाह मेले में निकली जलेब में शिरकत करते देवी-देवता और देवलू।
- फोटो : Mandi
थुनाग (मंडी)। सराजघाटी का ऐतिहासिक जिला स्तरीय कुथाह मेला रविवार को ढोल नगाड़ों की थाप पर शुरू हो गया। मेले का शुभारंभ देवी महामाया, ब्रह्मदेव तुंगासी, शृंग ऋषि और देव भूमासी के आगमन के साथ हुआ। इस दौरान देवी महामाया मंदिर से मेला मैदान तक जलेब निकाली गई। इसमें क्षेत्रवासियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। पूरा मेला मैदान देव ध्वनियों से गूंज उठा।
कोरोना काल के चलते मेले का आयोजन दो वर्षों से नहीं हो सका था। मेले में बतौर मुख्यातिथि एसडीएम थुनाग पारस अग्रवाल मौजूद रहे। स्कूल के छात्र-छात्राओं और महिला मंडल की सदस्यों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए।
मुख्यातिथि ने कहा कि मेले आपसी भाईचारे का प्रतीक हैं। इनसे जहां भाईचारा बढ़ता है, वहीं संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है। हमें अपनी संस्कृति को संजोए रखना चाहिए। इस अवसर पर स्थानीय पंचायत के प्रधान हेम सिंह ठाकुर, सचिव रिंकू चौहान, इंद्र सिंह ठाकुर आदि मौजूद रहे।
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गुच्छियों के कारोबार के लिए मशहूर है मेला
सराजघाटी में मनाया जाने वाला यह मेला व्यापारिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। एक तरफ इस मेले में अच्छा खासा कारोबार होता है, वहीं दूसरी तरफ यह मेला गुच्छियों के व्यापार के लिए विख्यात है। मेले में लाखों रुपयों का कारोबार होता है। घाटी के लोग पूरे सीजन में इकट्ठा की हुई गुच्छियों को मेले में बेचते हैं। इसके चलते लोगों को अच्छे खासे दाम मिल जाते हैं।
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कोरोना काल के चलते मेले का आयोजन दो वर्षों से नहीं हो सका था। मेले में बतौर मुख्यातिथि एसडीएम थुनाग पारस अग्रवाल मौजूद रहे। स्कूल के छात्र-छात्राओं और महिला मंडल की सदस्यों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए।
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मुख्यातिथि ने कहा कि मेले आपसी भाईचारे का प्रतीक हैं। इनसे जहां भाईचारा बढ़ता है, वहीं संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है। हमें अपनी संस्कृति को संजोए रखना चाहिए। इस अवसर पर स्थानीय पंचायत के प्रधान हेम सिंह ठाकुर, सचिव रिंकू चौहान, इंद्र सिंह ठाकुर आदि मौजूद रहे।
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गुच्छियों के कारोबार के लिए मशहूर है मेला
सराजघाटी में मनाया जाने वाला यह मेला व्यापारिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। एक तरफ इस मेले में अच्छा खासा कारोबार होता है, वहीं दूसरी तरफ यह मेला गुच्छियों के व्यापार के लिए विख्यात है। मेले में लाखों रुपयों का कारोबार होता है। घाटी के लोग पूरे सीजन में इकट्ठा की हुई गुच्छियों को मेले में बेचते हैं। इसके चलते लोगों को अच्छे खासे दाम मिल जाते हैं।
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