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जंगली गेंदा उगाकर आमदनी कमा सकते हैं युवा : राकेश

Thu, 28 Apr 2022 11:15 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2022 11:15 PM IST
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गोहर में किसानों-बागवानों को दिया जा रहा जंगली गेंदे का बीज। - फोटो : Mandi
गोहर (मंडी)। कमरूघाटी, कमांद और चौहारघाटी के किसान-बागवान अब जंगली गेंदे को उगाकर मालामाल हो सकेंगे। केंद्र सरकार की प्रायोजित योजना अरोमा मिशन के तहत हिमालयन बायोरिसोर्स टेकभनोलॉजी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर ने किसानों को 50 किलो जंगली गेंदा (टेजट्स म्युनिटा) का बीज प्रदान किया है।
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दावा किया कि युवाओं को गेंदे की खेती कम समय में अच्छा लाभ दे सकती है। आईएचबीटी के वैज्ञानिक डॉ. राकेश राणा ने कहा कि खेती के लिए खाली भूमि का प्रयोग कर युवा पर्यावरण को सहेजने में योगदान दे सकते हैं। साथ ही वन्य क्षेत्रों में भी इसे तैयार कर सकते हैं।
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कम समय में आमदनी बेहतर करने के लिए गेंदे की खेती को अच्छे विकल्प के रूप में युवा चुन सकते हैं। गेंदा सजावट के लिए ही नहीं बल्कि दवा बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। अफ्रीकन और फ्रेंच गेंदे के फूलों का प्रयोग पार्टी, विवाह समारोहों, गाड़ियों को सजाने और धार्मिक कार्यक्रमों में होता है। इसे गमलों और क्यारियों में लगाकर घरों और पार्कों की सुंदरता को चार चांद लगाए जा सकते हैं।
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चार बीघा जमीन के लिए एक किलो बीज काफी
ग्रोवर एसोसिएशन के प्रधान सुरेंद्र मोहन ने कहा कि चार बीघा में एक किलो बीज बहुत होता है। एक किलो फूल जो अच्छी स्थिति में हों, उसके 18 से 20 रुपये मिलते हैं। जंगली गेंदे से तेल निकाला जाता है। इसके सात हजार रुपये तक लेते हैं। युवा खाली भूमि को गेंदे की खेती के लिए उपयोग में ला सकते हैं। संवाद
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