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Mandi News: मकान क्षतिग्रस्त होने पर भी ममता ने नहीं मानी हार
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व्यंजनों से देशभर में कमा रही नाम
सिड्डू-मोमोज की होम डिलीवरी कर बेटियों की कर रही परवरिश
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जून 2025 में आई आपदा में मकान क्षतिग्रस्त होने के बावजूद थनेहड़ा निवासी ममता ने हार नहीं मानी और पति के साथ मिलकर सिड्डू-मोमोज कारोबार को आजीविका का साधन बनाया। दो दिनों से वह सेरी मंच मंडी में लगने वाले हाट बाजार में स्टॉल सजाने के साथ ही घर-घर होम डिलीवरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। पारंपरिक व्यंजनों के साथ ममता ने अपने कारोबार से देशभर में अलग पहचान बनाई है। दो महीने पहले गुजरात में सरदार पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित 15 दिवसीय भारत पर्व में ममता ने पति और अन्य सहयोगियों के साथ हिमाचल की पारंपरिक सिड्डू और मोमोज परोसकर हिमाचली व्यंजनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
ममता ने बताया कि उनका मायका मंडी शहर से लगभग आठ किलोमीटर दूर सदियाणा गांव में है। उन्होंने मंडी के थनेहड़ा निवासी लेखराज से शादी की है। शुरू से ही पति के साथ ढाबा संचालन का काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने सिड्डू, मोमोज और कचौरी का कारोबार शुरू किया। व्यवसाय अच्छे चलने पर ममता ने लक्ष्मी नारायण स्वयं सहायता समूह से जुड़कर सेरी मंच पर लगने वाले हाट बाजार में स्टॉल सजाना शुरू किया।
ममता ने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को वह हाट बाजार में स्टॉल लगाती हैं, जबकि अन्य दिनों में लोगों के घरों में होम डिलीवरी करती हैं। इसी मेहनत के दम पर उन्होंने थनेहड़ा में पांच कमरों का पक्का मकान बनाया था, जो 3 जून 2025 की आपदा में क्षतिग्रस्त हो गया। वर्तमान में वह दो बेटियों और पति के साथ किराए के मकान में रहकर आजीविका चला रही हैं। उनकी तीन बेटियां हैं। एक की शादी हो चुकी है, एक निजी कंपनी में कार्यरत है और एक बीटेक कर रही है। सिड्डू-मोमोज कारोबार से वह 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी अर्जित करती हैं। ममता का कहना है कि कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। विपत्तियों में भी खुद पर भरोसा रखते हुए लगातार कर्म करते रहने से सफलता अवश्य मिलती है।
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सिड्डू-मोमोज की होम डिलीवरी कर बेटियों की कर रही परवरिश
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जून 2025 में आई आपदा में मकान क्षतिग्रस्त होने के बावजूद थनेहड़ा निवासी ममता ने हार नहीं मानी और पति के साथ मिलकर सिड्डू-मोमोज कारोबार को आजीविका का साधन बनाया। दो दिनों से वह सेरी मंच मंडी में लगने वाले हाट बाजार में स्टॉल सजाने के साथ ही घर-घर होम डिलीवरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। पारंपरिक व्यंजनों के साथ ममता ने अपने कारोबार से देशभर में अलग पहचान बनाई है। दो महीने पहले गुजरात में सरदार पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित 15 दिवसीय भारत पर्व में ममता ने पति और अन्य सहयोगियों के साथ हिमाचल की पारंपरिक सिड्डू और मोमोज परोसकर हिमाचली व्यंजनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
ममता ने बताया कि उनका मायका मंडी शहर से लगभग आठ किलोमीटर दूर सदियाणा गांव में है। उन्होंने मंडी के थनेहड़ा निवासी लेखराज से शादी की है। शुरू से ही पति के साथ ढाबा संचालन का काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने सिड्डू, मोमोज और कचौरी का कारोबार शुरू किया। व्यवसाय अच्छे चलने पर ममता ने लक्ष्मी नारायण स्वयं सहायता समूह से जुड़कर सेरी मंच पर लगने वाले हाट बाजार में स्टॉल सजाना शुरू किया।
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ममता ने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को वह हाट बाजार में स्टॉल लगाती हैं, जबकि अन्य दिनों में लोगों के घरों में होम डिलीवरी करती हैं। इसी मेहनत के दम पर उन्होंने थनेहड़ा में पांच कमरों का पक्का मकान बनाया था, जो 3 जून 2025 की आपदा में क्षतिग्रस्त हो गया। वर्तमान में वह दो बेटियों और पति के साथ किराए के मकान में रहकर आजीविका चला रही हैं। उनकी तीन बेटियां हैं। एक की शादी हो चुकी है, एक निजी कंपनी में कार्यरत है और एक बीटेक कर रही है। सिड्डू-मोमोज कारोबार से वह 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी अर्जित करती हैं। ममता का कहना है कि कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। विपत्तियों में भी खुद पर भरोसा रखते हुए लगातार कर्म करते रहने से सफलता अवश्य मिलती है।
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