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स्वदेशी ज्ञान प्रणाली अपनाकर बनाएं रोडमैप : चंद्रशेखर
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थुनाग के बागवानी और वानिकी महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में लोगों को संबोधित करते
थुनाग (मंडी)। स्वदेशी ज्ञान प्रणाली सतत भविष्य के लिए रोड मैप विकसित भारत 2047 पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन बागवानी और वानिकी महाविद्यालय थुनाग में शुरू हुआ। इसमें धर्मपुर विस क्षेत्र के विधायक चंद्रशेखर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि आज औद्योगिक, टेक्नोलॉजी और डाटा का युग है। ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या सामने आ रही है। हमें औद्योगिक युग के साथ अपने वातावरण को संजोए रखते हुए स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देते हुए अगले भविष्य के लिए रोड मैप बनाना होगा।
कहा कि वैज्ञानिक शोधकर्ताओं के अनुसार हिमाचल जलवायु के तापमान में सामान्य से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इससे फसलें, फल की पैदावार प्रभावित हो रही है। पानी आदि की कमी हो सकती है। इसके लिए जीव जंतु, वनस्पति और अन्य जीवों को बचाने एवं बढ़ावा देने की जरूरत है। विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह के नेतृत्व में जैविक विविधता का संरक्षण करने और फसल विविधीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार हरित क्रांति के तहत बंजर पड़ी भूमि में सोलर ऊर्जा प्लांट लगाने में कार्यरत है।
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इस मौके पर बागवानी और विश्वविद्यालय नौणी, सोलन के उप कुलपति राजेश्वर सिंह चंदेल ने राष्ट्रीय सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों के बारे में बताया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि पदमश्री नेक राम शर्मा, कांग्रेस नेता जगदीश रेड्डी, डीन प्रोफेसर पीएल शर्मा, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. संजीव चौहान सहित अन्य मौजूद रहे।
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विशेषज्ञ देंगे व्याख्यान
सम्मेलन में विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर केंद्रित छह तकनीकी सत्रों में मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। मुख्य भाषण हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना (ऑनलाइन), वन कॉलेज और अनुसंधान संस्थान मेट्टुपालयम तमिलनाडु और एचपी जायका वानिकी परियोजना शिमला के विशेषज्ञों की ओर से दिया जाएगा। सम्मेलन में 17 विश्वविद्यालयों, अनुसंधान स्टेशनों और चार राष्ट्रीय संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले 8 राज्यों के 132 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
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विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि आज औद्योगिक, टेक्नोलॉजी और डाटा का युग है। ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या सामने आ रही है। हमें औद्योगिक युग के साथ अपने वातावरण को संजोए रखते हुए स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को बढ़ावा देते हुए अगले भविष्य के लिए रोड मैप बनाना होगा।
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कहा कि वैज्ञानिक शोधकर्ताओं के अनुसार हिमाचल जलवायु के तापमान में सामान्य से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इससे फसलें, फल की पैदावार प्रभावित हो रही है। पानी आदि की कमी हो सकती है। इसके लिए जीव जंतु, वनस्पति और अन्य जीवों को बचाने एवं बढ़ावा देने की जरूरत है। विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह के नेतृत्व में जैविक विविधता का संरक्षण करने और फसल विविधीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार हरित क्रांति के तहत बंजर पड़ी भूमि में सोलर ऊर्जा प्लांट लगाने में कार्यरत है।
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इस मौके पर बागवानी और विश्वविद्यालय नौणी, सोलन के उप कुलपति राजेश्वर सिंह चंदेल ने राष्ट्रीय सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों के बारे में बताया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि पदमश्री नेक राम शर्मा, कांग्रेस नेता जगदीश रेड्डी, डीन प्रोफेसर पीएल शर्मा, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. संजीव चौहान सहित अन्य मौजूद रहे।
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विशेषज्ञ देंगे व्याख्यान
सम्मेलन में विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर केंद्रित छह तकनीकी सत्रों में मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। मुख्य भाषण हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना (ऑनलाइन), वन कॉलेज और अनुसंधान संस्थान मेट्टुपालयम तमिलनाडु और एचपी जायका वानिकी परियोजना शिमला के विशेषज्ञों की ओर से दिया जाएगा। सम्मेलन में 17 विश्वविद्यालयों, अनुसंधान स्टेशनों और चार राष्ट्रीय संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले 8 राज्यों के 132 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
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