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Mandi News: मक्का की फसल को फॉल आर्मी वर्म का खतरा
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कृषि विभाग ने किसानों को किया अलर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। खरीफ सीजन के दौरान मक्का सहित अन्य फसलों पर फॉल आर्मी वर्म एवं आर्मी वर्म के संभावित प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग चंबा ने जिले के किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने किसानों से फसलों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती अवस्था में ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की अपील की है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गत वर्ष जिले के सलूणी, तीसा, मैहला और भटियात विकास खंडों में मक्का की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का हमला देखने को मिला था। वहीं, सलूणी क्षेत्र में आर्मी वर्म ने भी किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने बताया कि 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान, अधिक आर्द्रता, वर्षा के बाद का मौसम और खेतों में खरपतवार की अधिकता इन कीटों के तेजी से फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। फॉल आर्मी वर्म मुख्य रूप से मक्का की फसल को प्रभावित करता है लेकिन यह ज्वार, बाजरा, धान, गन्ना, गेहूं, चारा सहित कुछ सब्जी की फसलों पर भी हमला कर सकता है। इसकी पहचान पत्तियों पर सफेद खुरचाव जैसे निशान, बड़े छेद, पौधे की व्हॉर्ल में भूरे रंग के बुरादे तथा सुंडी के सिर पर अंग्रेजी के वाई आकार के सफेद निशान से की जा सकती है। आर्मी वर्म की सुंडियां समूह में रहकर रात के समय फसलों की पत्तियों को तेजी से नुकसान पहुंचाती हैं। किसानों को सप्ताह में कम से कम दो बार खेतों का निरीक्षण करने, प्रभावित पौधों से सुंडियों को नष्ट करने, खेतों को खरपतवार मुक्त रखने सहित प्रति हेक्टेयर 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी है। साथ ही संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने और नाइट्रोजन उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग नहीं करने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर किसान मेटाराइजियम एनीसोप्लाए एवं ब्यूवेरिया बैसियाना जैसे जैविक विकल्प अपना सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। खरीफ सीजन के दौरान मक्का सहित अन्य फसलों पर फॉल आर्मी वर्म एवं आर्मी वर्म के संभावित प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग चंबा ने जिले के किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने किसानों से फसलों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती अवस्था में ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की अपील की है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गत वर्ष जिले के सलूणी, तीसा, मैहला और भटियात विकास खंडों में मक्का की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का हमला देखने को मिला था। वहीं, सलूणी क्षेत्र में आर्मी वर्म ने भी किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने बताया कि 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान, अधिक आर्द्रता, वर्षा के बाद का मौसम और खेतों में खरपतवार की अधिकता इन कीटों के तेजी से फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। फॉल आर्मी वर्म मुख्य रूप से मक्का की फसल को प्रभावित करता है लेकिन यह ज्वार, बाजरा, धान, गन्ना, गेहूं, चारा सहित कुछ सब्जी की फसलों पर भी हमला कर सकता है। इसकी पहचान पत्तियों पर सफेद खुरचाव जैसे निशान, बड़े छेद, पौधे की व्हॉर्ल में भूरे रंग के बुरादे तथा सुंडी के सिर पर अंग्रेजी के वाई आकार के सफेद निशान से की जा सकती है। आर्मी वर्म की सुंडियां समूह में रहकर रात के समय फसलों की पत्तियों को तेजी से नुकसान पहुंचाती हैं। किसानों को सप्ताह में कम से कम दो बार खेतों का निरीक्षण करने, प्रभावित पौधों से सुंडियों को नष्ट करने, खेतों को खरपतवार मुक्त रखने सहित प्रति हेक्टेयर 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी है। साथ ही संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने और नाइट्रोजन उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग नहीं करने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर किसान मेटाराइजियम एनीसोप्लाए एवं ब्यूवेरिया बैसियाना जैसे जैविक विकल्प अपना सकते हैं।
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