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महर्षि मार्कंडेय, देव घटोत्कच देवमहाकुंभ मेले के लिए आज होंगे रवाना
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देव महर्षि मार्कंडेय और देव घटोत्कच बागी।
- फोटो : Mandi
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मंडी। महर्षि मार्कंडेय के साथ घटोत्कच महाराज बागी देव भी महाशिवरात्रि की शोभा बढ़ाने के लिए तैयार हैं। 20 फरवरी को वह मूल स्थान से महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए 300 देवलुओं के साथ रवाना होंगे। इन देवताओं का बालीचौकी के बागी के पास मिलन होगा।
महाशिवरात्रि तक दोनों साथ रहेंगे। जिला मुख्यालय से 110 किमी दूर झमाच नामक स्थान पर मार्कंडेय ऋषि का प्राचीन मंदिर है। देवता घटोत्कच बागी का 75 किमी दूर मंदिर है। देवता एक मार्च को महाशिवरात्रि के दिन मंडी में राजदेवता माधो राय से मिलेंगे। देवता, कारदार सात दिन तक राम चंद्र मंदिर पड्डल में रहेंगे। नौ मार्च को अपने देवालय के लिए रवाना होंगे।
ये दोनों महाशिवरात्रि महोत्सव की जलेब में भी दूसरे स्थान पर चलते हैं। मान्यता है कि देव मार्कंडेय सबकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सावन मास की त्रयोदशी में एक मेले का आयोजन किया जाता है। मेले को लोग राजा का मेला नाम से पुकारते हैं क्योंकि पूर्वजों के अनुसार मेले का आरंभ राजा ने ही किया था।
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मंदिर की विशेषता है कि यहां किसी की जानवर की बलि नहीं दी जाती है। सर्व देवता सेवा समिति के प्रधान शिवपाल शर्मा ने बताया कि देव मार्कंडेय ऋषि और घटोत्कच बागी 20 फरवरी को अपने मूल स्थान से रवाना होंगे। एक मार्च को मंडी पहुंचेंगे और माधो राज से मिलन करेंगे। संवाद
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महाशिवरात्रि तक दोनों साथ रहेंगे। जिला मुख्यालय से 110 किमी दूर झमाच नामक स्थान पर मार्कंडेय ऋषि का प्राचीन मंदिर है। देवता घटोत्कच बागी का 75 किमी दूर मंदिर है। देवता एक मार्च को महाशिवरात्रि के दिन मंडी में राजदेवता माधो राय से मिलेंगे। देवता, कारदार सात दिन तक राम चंद्र मंदिर पड्डल में रहेंगे। नौ मार्च को अपने देवालय के लिए रवाना होंगे।
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ये दोनों महाशिवरात्रि महोत्सव की जलेब में भी दूसरे स्थान पर चलते हैं। मान्यता है कि देव मार्कंडेय सबकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सावन मास की त्रयोदशी में एक मेले का आयोजन किया जाता है। मेले को लोग राजा का मेला नाम से पुकारते हैं क्योंकि पूर्वजों के अनुसार मेले का आरंभ राजा ने ही किया था।
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मंदिर की विशेषता है कि यहां किसी की जानवर की बलि नहीं दी जाती है। सर्व देवता सेवा समिति के प्रधान शिवपाल शर्मा ने बताया कि देव मार्कंडेय ऋषि और घटोत्कच बागी 20 फरवरी को अपने मूल स्थान से रवाना होंगे। एक मार्च को मंडी पहुंचेंगे और माधो राज से मिलन करेंगे। संवाद