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स्कूलों में लाइटनिंग कंडक्टर को लेकर रिपोर्ट तलब
मंडी
Updated Fri, 22 Jul 2016 07:29 PM IST
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lighting strikes monument
- फोटो : daily mail
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मंडी। जिले के बीस ब्लॉकों के 1800 सरकारी स्कूलों में बिजली गिरने से कभी भी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर ‘अमर उजाला’ ने इस मसले को प्रमुखता से उठाया था। गत माह आठ जून के संस्करण में बिजली गिरी तो महफूज नहीं जिले के 18 सौ प्राइमरी स्कूल शीर्षक से छपी खबर के बाद जिला प्रशासन फिर हरकत में आया है। डीसी मंडी ने शिक्षा विभाग मंडी से स्कूलों में लाइटनिंग कंडक्टर संबंधी रिपोर्ट तलब की है। लेकिन, हादसे के एक वर्ष बाद भी विभाग बजट न होने का रोना रो रहा है।
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पिछले वर्ष जिला उपायुक्त ने हादसे के बाद शिक्षा विभाग को आदेश जारी किए थे कि लाइटनिंग जोन में जो स्कूल आते हैं, वहां लाइटनिंग कंडक्टर लगाए जाएंगे। उच्च शिक्षा उप निदेशक ने जिला के सभी स्कूलों को पत्र जारी कर लाइटनिंग कंडक्टर लगाने के आदेश जारी किए थे। मगर शिक्षा उप निदेशक को तमाम स्कूलों से यही जवाब मिला कि बजट के अभाव में स्कूल प्रबंधन स्कूल में लाइटनिंग कंडक्टर लगाने में असमर्थ है। हालांकि, कई स्कूलों में भवन बजट मौजूद है। जिसे अगर स्कूल और विभाग चाहे तो लाइटनिंग कंडक्टर लगाने के लिए खर्च कर सकता है। गत वर्ष रोहांडा के औकल स्कूल में बिजली गिरने से एक बच्ची की मौत हो गई थी। इस घटना के एक वर्ष बाद भी विभाग और प्रशासन ने इस घटना से सबक नहीं लिया है। जिला के एक भी स्कूल में लाइटनिंग कंडक्टर नहीं लगा है। हादसे के बाद निर्देशों और आदेशों का खूब दौर चला था। लेकिन, परिणाम एक वर्ष बीत जाने के बाद भी शून्य हैं। हालांकि, जून माह में अमर उजाला ने इस मामले में प्रशासन और विभागीय कोताही को प्रमुखता से छापा था। जिसके बाद फिर आदेशों और निर्देशों का दौर शुरू हो गया
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कोट्...........
जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी गई है। पूर्व में स्कूलों को भवन बजट से लाइटनिंग कंडक्टर लगाने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन, स्कूलों में बजट की कमी के बारे में जिला प्रशासन व निदेशालय को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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...अशोक कुमार उपनिदेशक उच्च शिक्षा मंडी।