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Mandi News: किसान सभा ने वनाधिकार कानून पर फैलाई जागरूकता
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सरकाघाट (मंडी)। हिमाचल किसान सभा और ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से सोमवार को पंचायत समिति हाल सरकाघाट में वनाधिकार कानून-2006 को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें धर्मपुर और गोपालपुर खंडों के किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला की अध्यक्षता पूर्व जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह, रणताज राणा, दिनेश काकू और सुरेश शर्मा ने की।
कार्यशाला में हिमालय नीति अभियान के गुमान सिंह और संदीप मिन्हास ने बतौर स्रोत व्यक्ति शामिल होकर वनाधिकार कानून की पृष्ठभूमि और वर्तमान सरकार की ओर से इसे लागू करने के निर्णय के बाद किसानों के कब्जे वाली भूमि उनके नाम नियमितीकरण की प्रक्रिया के बारे मे विस्तृत जानकारी दी। इसके आवेदन करने के तौर तरीकों का प्रशिक्षण दिया।
स्रोत व्यक्ति गुमान सिंह ने बताया कि वनाधिकार कानून को संसद में पारित किए गए बीस वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है। वर्तमान सरकार ने इसे लागू करने का फैसला लिया है जोकि स्वागत योग्य है। कहा कि इस कानून के लागू होने से वर्ष 2005 तक सरकारी भूमि जिसे वन भूमि भी कहा जाता है, पर किसानों के कब्जे में 20 बीघा जमीन और मकानों को नियमित करने का प्रावधान है। उसके पट्टे किसानों के नाम जारी करने का प्रावधान है। इसके लिए पंचायतों और राजस्व गांवों में वनाधिकार समितियां गठित होनी हैं। वहीं, भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इस कानून को तेजी से लागू करने और कब्जाधारियों को जारी नोटिसों को वापस लेने की मांग को लेकर 28 अप्रैल को धर्मपुर और सरकाघाट में पांच मई को प्रदर्शन किए जाएंगे।
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कार्यशाला में हिमालय नीति अभियान के गुमान सिंह और संदीप मिन्हास ने बतौर स्रोत व्यक्ति शामिल होकर वनाधिकार कानून की पृष्ठभूमि और वर्तमान सरकार की ओर से इसे लागू करने के निर्णय के बाद किसानों के कब्जे वाली भूमि उनके नाम नियमितीकरण की प्रक्रिया के बारे मे विस्तृत जानकारी दी। इसके आवेदन करने के तौर तरीकों का प्रशिक्षण दिया।
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स्रोत व्यक्ति गुमान सिंह ने बताया कि वनाधिकार कानून को संसद में पारित किए गए बीस वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है। वर्तमान सरकार ने इसे लागू करने का फैसला लिया है जोकि स्वागत योग्य है। कहा कि इस कानून के लागू होने से वर्ष 2005 तक सरकारी भूमि जिसे वन भूमि भी कहा जाता है, पर किसानों के कब्जे में 20 बीघा जमीन और मकानों को नियमित करने का प्रावधान है। उसके पट्टे किसानों के नाम जारी करने का प्रावधान है। इसके लिए पंचायतों और राजस्व गांवों में वनाधिकार समितियां गठित होनी हैं। वहीं, भूपेंद्र सिंह ने कहा कि इस कानून को तेजी से लागू करने और कब्जाधारियों को जारी नोटिसों को वापस लेने की मांग को लेकर 28 अप्रैल को धर्मपुर और सरकाघाट में पांच मई को प्रदर्शन किए जाएंगे।
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