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लोहड़ी, मकर संक्रांति पर्व पर बांटी खिचड़ी
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मंडी के महामृत्युंजय मंदिर में लोहड़ी पर्व पर गिठ्ठा पूजन करते पुजारी और श्रद्धालु।
- फोटो : Mandi
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मंडी। जिले में लोहड़ी और मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया। घर-घर में पारंपरिक व्यंजन बनाए गए और एक-दूसरे को बांटे। लोहड़ी की रात को लोगों ने कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए। गिट्ठा जलाकर मूंगफली और रेवड़ी चढ़ाकर गीत-संगीत के साथ लोहड़ी का पर्व बनाया।
सुबह होते ही पूजा-पाठ और स्नान के बाद खिचड़ी बनाई और एक-दूसरे को खिलाई। शुक्रवार सुबह सबसे पहले लोगों ने खिचड़ी पितरों को अर्पित की। इसके बाद सगे-संबंधी, रिश्तेदार और पड़ोसियों को खिचड़ी परोसी। लोगों ने सुबह उठकर पवित्र स्थानों पर जाकर स्नान, तुलादान और पूजा-पाठ भी किया।
नवग्रह पूजन भी किया गया। पूरा वर्ष भर सुख-समृद्धि की मन्नत मांगी। इस दिन से ही माघ महीना शुरू होता है। इस दिन से गर्मी का हल्का हल्का एहसास और दिन बढ़ना शुरू होते हैं। हिंदु मान्यता के अनुसार इस महीने को धर्मी महीना भी कहा जाता है।
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सराज, नाचन, सरकाघाट, धर्मपुर, जोगिंद्रनगर, पधर और अन्य क्षेत्र में पारंपरिक ढंग से लोहड़ी पर्व मनाया गया। महामृत्युंजय मंदिर मंडी में वीरवार देर शाम लोहड़ी पर्व पर अंगीठा जलाकर विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। बाबा भूतनाथ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि यह पर्व समरसता का भी प्रतीक है। मान्यता के अनुसार माघ महीना में दान पुण्य करने का विशेष महत्व रहता है।
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सुबह होते ही पूजा-पाठ और स्नान के बाद खिचड़ी बनाई और एक-दूसरे को खिलाई। शुक्रवार सुबह सबसे पहले लोगों ने खिचड़ी पितरों को अर्पित की। इसके बाद सगे-संबंधी, रिश्तेदार और पड़ोसियों को खिचड़ी परोसी। लोगों ने सुबह उठकर पवित्र स्थानों पर जाकर स्नान, तुलादान और पूजा-पाठ भी किया।
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नवग्रह पूजन भी किया गया। पूरा वर्ष भर सुख-समृद्धि की मन्नत मांगी। इस दिन से ही माघ महीना शुरू होता है। इस दिन से गर्मी का हल्का हल्का एहसास और दिन बढ़ना शुरू होते हैं। हिंदु मान्यता के अनुसार इस महीने को धर्मी महीना भी कहा जाता है।
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सराज, नाचन, सरकाघाट, धर्मपुर, जोगिंद्रनगर, पधर और अन्य क्षेत्र में पारंपरिक ढंग से लोहड़ी पर्व मनाया गया। महामृत्युंजय मंदिर मंडी में वीरवार देर शाम लोहड़ी पर्व पर अंगीठा जलाकर विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। बाबा भूतनाथ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि यह पर्व समरसता का भी प्रतीक है। मान्यता के अनुसार माघ महीना में दान पुण्य करने का विशेष महत्व रहता है।
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