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Mandi News: कोट वार्ड में बागियों और निर्दलियों से उलझा चुनावी गणित

Thu, 21 May 2026 12:02 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2026 12:02 AM IST
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In Kot ward, the electoral mathematics is complicated by rebels and independents.
सात उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से भाजपा-कांग्रेस की बढ़ीं मुश्किलें
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मुस्लिम समुदाय से पहली बार मुमताज मांडा ने ठोकी ताल
संवाद न्यूज एजेंसी

सुंदरनगर (मंडी)। बल्ह के जिला परिषद वार्ड कोट में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। वार्ड की 17 पंचायतों में सात उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है, वहीं निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों ने मुकाबले को और भी त्रिकोणीय बना दिया है।



भाजपा समर्थित उम्मीदवारों में मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े प्रेम सिंह उर्फ पाल राणा प्रमुख हैं। पिछली बार उनकी पत्नी इसी वार्ड से मामूली अंतर से चुनाव हार गई थीं। दूसरी ओर भाजपा से जुड़े पूर्व प्रधान रविंद्र राणा, जो पिछले दो दशकों से पंचायती राज राजनीति में सक्रिय हैं, पार्टी से बगावत कर चुनाव मैदान में उतर गए हैं। इसके अलावा भाजपा से जुड़े राकेश और रमेश ने भी बागी तेवर अपनाते हुए चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
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कांग्रेस की ओर से सलवाहन पंचायत के पूर्व प्रधान पंकज चौधरी मैदान में हैं। वहीं, कांग्रेस से जुड़े पूर्व सैनिक और पूर्व जोन अध्यक्ष जंग बहादुर भी चुनावी दावेदारी कर रहे हैं। जंग बहादुर करीब 15 वर्षों तक कांग्रेस संगठन में जोन अध्यक्ष रह चुके हैं। दूसरी ओर आरक्षित वर्ग से संबंध रखने वाले पंकज चौधरी पहले ओपन सीट से प्रधान रह चुके हैं और इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने जिला परिषद चुनाव में अपनी दावेदारी मजबूत की है।
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इसी वार्ड में मुमताज मांडा भी खास चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि करीब 70 वर्षों में पहली बार मुस्लिम समुदाय से कोई उम्मीदवार इस क्षेत्र से जिला परिषद चुनाव लड़ रहा है। बीएससी और बीएड शिक्षित मुमताज वर्तमान में ठेकेदारी का कार्य करते हैं। उनके पिता फजल दीन डुगराई पंचायत में करीब 20 वर्षों तक प्रधान रह चुके हैं।

कुल मिलाकर कोट वार्ड में इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों, बागी नेताओं के प्रभाव और स्थानीय पकड़ के आधार पर भी तय होता नजर आ रहा है।
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