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Mandi News: कल बादल बरसे तो पुजारी बोधराज बनेंगे कमरुनाग के गूर
Thu, 22 Jan 2026 06:29 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 22 Jan 2026 06:29 AM IST
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गोहर (मंडी)। एक सप्ताह पहले दिया गया बारिश का अल्टीमेटम अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आगामी 23 जनवरी को अगर आसमान से पानी बरसा तो जनपद के आराध्य बड़ादेव कमरुनाग के पुजारी बोधराज की गुरापीरी लगभग तय मानी जा रही है। मौसम विभाग ने भी इसी दिन बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है, जिससे देव समाज के साथ-साथ किसान, बागवान और आम जनता की निगाहें अब पूरी तरह आसमान पर टिक गई हैं।
लंबे समय से जारी सूखे और बारिश न होने से त्रस्त क्षेत्र के किसान-बागवानों ने देव परंपरा के अनुसार बड़ादेव कमरुनाग से वर्षा की गुहार लगाई थी लेकिन बीते दिनों नौ गूरों द्वारा पूजा-अर्चना और मनौतियों के बावजूद जब बादल नहीं बरसे तो 15 जनवरी को सात गढ़ क्षेत्र के लोगों ने तत्कालीन गूर देवी सिंह से बड़ादेव लेकर उन्हें पुजारी बोधराज के सुपुर्द कर दिया।
अब देव परंपरा के अनुसार पुजारी के हवाले देवता सौंपे जाने के बाद यदि निश्चित अवधि में बारिश होती है तो उसी के आधार पर गुरापीरी का फैसला होता है। यही वजह है कि 23 जनवरी को होने वाली संभावित बारिश को बेहद अहम माना जा रहा है। क्षेत्र में हालात ऐसे हैं कि सेब और अन्य बागवानी फसलों को नमी की सख्त जरूरत है। रबी की फसल भी पानी के इंतजार में सूखती नजर आ रही है। ऐसे में यह दिन केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं बल्कि कृषि और भविष्य की आजीविका से भी जुड़ गया है।
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अगर 23 जनवरी को धरती पानी से तर होती है तो इसे देव कृपा के रूप में देखा जाएगा और देव समाज समेत आम जनमानस को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं यदि बादल फिर भी मेहरबान नहीं हुए तो आने वाले दिनों में देव परंपरा के तहत अगला कदम क्या होगा, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। अब देखना यही होगा कि 23 जनवरी को मौसम क्या गुल खिलाता है राहत या फिर एक और परीक्षा।
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लंबे समय से जारी सूखे और बारिश न होने से त्रस्त क्षेत्र के किसान-बागवानों ने देव परंपरा के अनुसार बड़ादेव कमरुनाग से वर्षा की गुहार लगाई थी लेकिन बीते दिनों नौ गूरों द्वारा पूजा-अर्चना और मनौतियों के बावजूद जब बादल नहीं बरसे तो 15 जनवरी को सात गढ़ क्षेत्र के लोगों ने तत्कालीन गूर देवी सिंह से बड़ादेव लेकर उन्हें पुजारी बोधराज के सुपुर्द कर दिया।
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अब देव परंपरा के अनुसार पुजारी के हवाले देवता सौंपे जाने के बाद यदि निश्चित अवधि में बारिश होती है तो उसी के आधार पर गुरापीरी का फैसला होता है। यही वजह है कि 23 जनवरी को होने वाली संभावित बारिश को बेहद अहम माना जा रहा है। क्षेत्र में हालात ऐसे हैं कि सेब और अन्य बागवानी फसलों को नमी की सख्त जरूरत है। रबी की फसल भी पानी के इंतजार में सूखती नजर आ रही है। ऐसे में यह दिन केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं बल्कि कृषि और भविष्य की आजीविका से भी जुड़ गया है।
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अगर 23 जनवरी को धरती पानी से तर होती है तो इसे देव कृपा के रूप में देखा जाएगा और देव समाज समेत आम जनमानस को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं यदि बादल फिर भी मेहरबान नहीं हुए तो आने वाले दिनों में देव परंपरा के तहत अगला कदम क्या होगा, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। अब देखना यही होगा कि 23 जनवरी को मौसम क्या गुल खिलाता है राहत या फिर एक और परीक्षा।