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दहेज प्रताड़ना का आरोपी पति बरी
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मंडी। विवाहिता को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए विवश करने का आरोप साबित न होने पर अदालत ने आरोपी पति को बरी कर दिया है।
सत्र न्यायाधीश ने बल्ह तहसील के टिक्कर गांव निवासी नरेश कुमार के खिलाफ भादंसं की धारा 498-ए और 306 के तहत विवाहिता को प्रताडित करने और उसको आत्महत्या के लिए विवश करने का अभियोग साबित न होने पर उसे अभियोग से बरी कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पत्नी ने आरोपी की मारपीट के कारण फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ मामला दर्ज करके अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में 13 गवाहों के बयान कलमबंद किए गए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन को इस मामले में यह साबित करना था कि आरोपी ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी थी कि जिसके कारण मृतका के सामने आत्महत्या के सिवाय कोई अन्य रास्ता न था।
अदालत ने फैसले में कहा कि हालांकि यह साबित हुआ है कि आरोपी का मृतका के साथ एक साल पहले झगड़ा हुआ था। इसकी उसने माफी मांग ली थी। इसके बाद मृतका ने कोई शिकायत नहीं की थी। एक साल पहले की प्रताड़ना जिसमें समझौता हो गया को ऐसी परिस्थिति नहीं माना जा सकता कि मृतका के पास आत्महत्या के अलावा कोई और रास्ता नहीं था।
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ऐसे में अदालत ने माना कि आरोपी पर दहेज के लिए क्रूरता और आत्महत्या को विवश करने का अभियोग साबित नहीं हुआ है। इसके चलते अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है।
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सत्र न्यायाधीश ने बल्ह तहसील के टिक्कर गांव निवासी नरेश कुमार के खिलाफ भादंसं की धारा 498-ए और 306 के तहत विवाहिता को प्रताडित करने और उसको आत्महत्या के लिए विवश करने का अभियोग साबित न होने पर उसे अभियोग से बरी कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पत्नी ने आरोपी की मारपीट के कारण फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ मामला दर्ज करके अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में 13 गवाहों के बयान कलमबंद किए गए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन को इस मामले में यह साबित करना था कि आरोपी ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी थी कि जिसके कारण मृतका के सामने आत्महत्या के सिवाय कोई अन्य रास्ता न था।
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अदालत ने फैसले में कहा कि हालांकि यह साबित हुआ है कि आरोपी का मृतका के साथ एक साल पहले झगड़ा हुआ था। इसकी उसने माफी मांग ली थी। इसके बाद मृतका ने कोई शिकायत नहीं की थी। एक साल पहले की प्रताड़ना जिसमें समझौता हो गया को ऐसी परिस्थिति नहीं माना जा सकता कि मृतका के पास आत्महत्या के अलावा कोई और रास्ता नहीं था।
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ऐसे में अदालत ने माना कि आरोपी पर दहेज के लिए क्रूरता और आत्महत्या को विवश करने का अभियोग साबित नहीं हुआ है। इसके चलते अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है।