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सद्भावयुक्त जीवन जीने की कला सीखे मनुष्य : सुदीक्षा
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ऐतिहासिक पड्डल मैदान में निरंकारी समागम को संबोधित करतीं माता सतगुरु सुदीक्षा महाराज।
- फोटो : Mandi
मंडी। मनुष्य को सद्भाव युक्त जीवन जीने की कला सीखनी चाहिए। यह उद्गार निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने मंडी में कही।
शनिवार को पड्डल मैदान में निरंकारी समागम में माता सुदीक्षा ने कहा कि ब्रह्मज्ञान की रोशनी से परमात्मा को जानकर जीवन में स्थिरता को प्राप्त किया जा सकता है। परमात्मा की भक्ति का पक्का रंग जब भक्त पर चढ़ता है तब वह दुनियावी चीजों से प्रभावित नहीं होता।
हमारा शरीर तो नश्वर है किंतु आत्मा शाश्वत होती है, जब उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है तब उसकी यह दिव्य यात्रा संपन्न हो जाती है।
निरंकारी मिशन के जोनल प्रभारी राम किशन अभिलाषी ने बताया कि शनिवार को पड्डल स्थित झूला मैदान में समागम के दौरान मंडी सहित आस पास के जिलों और बाहरी राज्यों की निरंकारी संगत ने अपनी हाजिरी भरी। इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया गया। संवाद
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शनिवार को पड्डल मैदान में निरंकारी समागम में माता सुदीक्षा ने कहा कि ब्रह्मज्ञान की रोशनी से परमात्मा को जानकर जीवन में स्थिरता को प्राप्त किया जा सकता है। परमात्मा की भक्ति का पक्का रंग जब भक्त पर चढ़ता है तब वह दुनियावी चीजों से प्रभावित नहीं होता।
हमारा शरीर तो नश्वर है किंतु आत्मा शाश्वत होती है, जब उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है तब उसकी यह दिव्य यात्रा संपन्न हो जाती है।
निरंकारी मिशन के जोनल प्रभारी राम किशन अभिलाषी ने बताया कि शनिवार को पड्डल स्थित झूला मैदान में समागम के दौरान मंडी सहित आस पास के जिलों और बाहरी राज्यों की निरंकारी संगत ने अपनी हाजिरी भरी। इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया गया। संवाद
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