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Mandi News: छतरी मेले में देवी-देवताओं ने बढ़ाई शोभा
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छतरी में मगरु महादेव के प्रांगण में छतरी मेले में उपस्थित देवी देवता। संवाद
थुनाग (मंडी)। जिले के मगरू मानगढ़ इलाके का प्रसिद्ध छतरी मेला शनिवार को पलैच की स्थापना के साथ शुरू हुआ। यह पांच दिवसीय मेला 16 से 20 अगस्त तक चलेगा, जिसमें क्षेत्र के आराध्य देवता मगरू महादेव हारियानों के साथ पधारे। मेले में देव चपलांदू नाग, नारायण, चूड़ेश्वर महाराज, तींदरी महादेव, धनेलू, कृपालु, खोड़ू सहित एक दर्जन स्थानीय देवी-देवता तीन दिन तक विराजमान रहेंगे।
मेले में देव उत्सव के साथ खेलकूद प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। मेले में एसएमएस च्वासी के कलाकार और 19 अगस्त को स्टार पहाड़ी कलाकार हनी नेगी रंगारंग प्रस्तुतियां देंगे। स्थानीय महिला मंडल, युवक मंडल, स्कूल और कॉलेज के कलाकार भी दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। मगरू महादेव के कारदार कश्मीर सिंह ठाकुर ने बताया कि मेला परंपरागत रूप से पलैच के आगमन से शुरू होता है, जिसमें जंगल से पेड़ काटकर वाद्ययंत्रों के साथ मंदिर में स्थापित किया जाता है।
मगरू महादेव मंदिर 13वीं शताब्दी का प्राचीन काष्ठ शिल्प का बेजोड़ नमूना है, जिसमें लकड़ी में नक्काशी और शिव-पार्वती की पाषाण प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र हैं। छतरी मेला सराज के प्रमुख मेलों में से एक है, जो थुनाग से 40 किलोमीटर दूर पहाड़ों और नदियों के बीच बसा है। स्थानीय पंचायत प्रधान रघुनाथ कटोच ने कहा कि मेले हमारी समृद्ध संस्कृति के प्रतीक हैं। यह ग्रामीणों को मनोरंजन और रिश्तेदारों से मिलने का अवसर देते हैं। संवाद
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मेले में देव उत्सव के साथ खेलकूद प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। मेले में एसएमएस च्वासी के कलाकार और 19 अगस्त को स्टार पहाड़ी कलाकार हनी नेगी रंगारंग प्रस्तुतियां देंगे। स्थानीय महिला मंडल, युवक मंडल, स्कूल और कॉलेज के कलाकार भी दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। मगरू महादेव के कारदार कश्मीर सिंह ठाकुर ने बताया कि मेला परंपरागत रूप से पलैच के आगमन से शुरू होता है, जिसमें जंगल से पेड़ काटकर वाद्ययंत्रों के साथ मंदिर में स्थापित किया जाता है।
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मगरू महादेव मंदिर 13वीं शताब्दी का प्राचीन काष्ठ शिल्प का बेजोड़ नमूना है, जिसमें लकड़ी में नक्काशी और शिव-पार्वती की पाषाण प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र हैं। छतरी मेला सराज के प्रमुख मेलों में से एक है, जो थुनाग से 40 किलोमीटर दूर पहाड़ों और नदियों के बीच बसा है। स्थानीय पंचायत प्रधान रघुनाथ कटोच ने कहा कि मेले हमारी समृद्ध संस्कृति के प्रतीक हैं। यह ग्रामीणों को मनोरंजन और रिश्तेदारों से मिलने का अवसर देते हैं। संवाद
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