फोरलेन प्रभावितों की गुहार, इस मुआवजे में कैसे बसेंगे सरकार
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मंडी। नागचला से मनाली प्रस्तावित फोरलेन के लिए अधिग्रहण की जा रही भूमि की एवज में मिल रहे मुआवजे में प्रभावितों को दूसरी जगह पर घर बसाना मुश्किल है। वर्ष 2013-14 में निर्धारित सर्किट रेट के आधार पर प्रभावितों को दोगुना मुआवजा अवार्ड किया गया। जबकि किसानों की जमीन का मौजूदा बाजार भाव मुआवजा राशि से कई गुणा अधिक है। नागचला से मनाली तक बनने वाले फोरलेन से करीब साढ़े नौ हजार परिवार प्रभावित होंगे। पहली बार नागचला से मनाली तक प्रस्तावित फोरलेन में भू-अधिग्रहण कानून-2013 को लागू किया जा रहा है। लेकिन प्रभावितों को इस कानून के माध्यम से भी मुआवजे में न्याय नहीं मिल रहा है। फोरलेन का मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र में गूंजने की उम्मीद है।
फोरलेन के लिए कुल्लू जिला के रामशिला से छाटनसेरी तक प्रभावितों को 5 व 10 मई 2016 को भू अर्जन अधिकारी पंडोह ने मुआवजा अवार्ड कर 25 अगस्त तक जमीनें और मकान खाली करने के नोटिस थमा दिए हैं। साथ ही काम भी ठेकेदार को दिया जा चुका है। जिससे किसी भी समय प्रभावितों के मकानों पर बुलडोजर चल सकता है। फोरलेन के इस ज्वलंत मुद्दे को विपक्ष सदन में उठा सकता है।
भू-अधिग्रहण कानून-2013 के सेक्शन 26 के अनुसार भू-अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना के साथ ही संबंधित कलेक्टर की ओर से भूमि की मार्केट वैल्यू का निर्धारण वर्तमान बाजार भाव पर किया जाना था। लेकिन जिला कुल्लू में वर्ष 2014-15 और 2015-16 में सर्किट रेट को रिवाइज नहीं किया गया। भू अर्जन अधिकारी ने 5 व 10 मई को रामशिला से छाटनसेरी तक के प्रभावितों को 2013-14 के सर्किल रेट से मुआवजा अवार्ड किया है।
कुल्लू से सट्टे कांगती मुहाल का 2013 में सर्किल रेट 13200, बाशिंग 160280, बबेली बनोगी 110000, बबेली जंदोड़, 99320, मालतीबाग 55000, हरा बाग 43530, नागाबाग 43530, छाटनसेरी 55000 रुपये प्रति बिस्वा था। इस सर्किल रेट के आधार पर प्रति बिस्वा दोगुना मुआवजा दिया गया है। जबकि पूरे क्षेत्र में जमीन का बाजारी भाव 8 से 10 लाख रुपये बिस्वा है। अभी तक भवनों, पेड़-पौधों, फसलों और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन नहीं हुआ है। एकमुश्त अवार्ड न मिलने से प्रभावित अपने पुनर्वास और पुनर्स्थापना की व्यवस्था करने में असमर्थ हो रहे हैं।
फोरलेन संघर्ष समिति के अध्यक्ष ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर (रिटायर्ड ) और महासचिव ब्रजेश महंत का कहना है कि भू-अधिग्रहण कानून को ताक पर रख कर प्रभावितों के साथ अन्याय किया जा रहा है। आनन-फानन में प्रभावितों को वर्ष 2013-14 के सर्किट रेट के आधार पर मुआवजा अवार्ड किया जा रहा है। जबकि जमीन का मौजूदा कीमत कई गुणा अधिक है। ऐसे में प्रभावित दूसरी जगह पर अपना घर नहीं बसा सकता है।
इनसेट
फोरलेन प्रभावितों की समस्याओं और मुआवजे को लेकर गत दिनों मंडी में राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रभावितों को संतोषजनक जवाब नहीं मिला। राजस्व मंत्री का कहना था कि मुआवजा निर्धारित करने के लिए समझौता समितियों का गठन किया है। प्रभावितों की भूमि का उचित मुआवजा प्रदान करने के लिए मंडलायुक्त मंडी की देखरेख में समझौता समितियां गठित की गई हैं।