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Mandi News: लाडलों के डूबने की सूचना मिलते ही परिजन हुए बेसुध, मची चीख पुकार
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आईटीआई प्रशिक्षु पौते के डूबने के गम में विलाप करता दादा व ढांढस बंधाते लोग।
बालीचौकी (मंडी)। अपने लाडलों के डूबने की सूचना मिलने पर परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। घर में मातम छा गया है। युवक घनश्याम के डूबने की सूचना पर मां बेहोश हो गईं जबकि दूसरे युवक धर्मेंद्र की मां उसके घर आने के वादे को याद कर रही हैं। दोनों युवकों के परिवारों को सोशल मीडिया के माध्यम से अपने लाडलों के डूबने की सूचना मिली।
धमेंद्र कुमार पुत्र गीतानंद निवासी मुराह अपने दादा के साथ किराये के कमरे में थलौट में रहता था। छुट्टी के दिन अपने घर जाता था और इस बार शनिवार को जल्द पहुंचने की बात कहकर गया था। धर्मेंद्र की मां चंद्र देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने बेटे के घर पहुंचने के वादे की बात कहते हुए वह बेसुध हो गईं। धर्मेंद्र अपने माता-पिता का इकलौता चिराग था। घटना से अब घर में दुखों का पहाड़ टूट गया है।
घनश्याम सिंह के परिजनों को सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना की जानकारी मिली तो परिवार के होश ही उड़ गए। यह सुनते ही मां बेहोश हो गई। परिजनों और रिश्तेदारों ने मुश्किल से उसे संभाला। घनश्याम सिंह के दो और भाई हैं। तीनों थलौट में ही किराये के कमरे रहते थे और उनके माता पिता अपने घर में रहते थे। वे खेतीबाड़ी करके अपने तीनों बच्चों को पढ़ा रहे थे।
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ग्राम पंचायत बुंगजहलगाड़ की प्रधान उषा चौहान ने कहा कि घनश्याम का परिवार बेहद गरीब है। बड़ी मुश्किलों के बीच बच्चों की पढ़ाई करवा रहे थे। ऐसे में इस परिवार के घर में दुखों का पहाड़ टूट गया है। वहीं, मुराह पंचायत के उपप्रधान इंद्र सिंह ने बताया कि धर्मेंद्र परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी एक बहन है। बेटे को पढ़ाई के लिए थलौट में भेजा था, लेकिन इस घटना परिवार को झकझोर कर रख दिया है। संवाद
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धमेंद्र कुमार पुत्र गीतानंद निवासी मुराह अपने दादा के साथ किराये के कमरे में थलौट में रहता था। छुट्टी के दिन अपने घर जाता था और इस बार शनिवार को जल्द पहुंचने की बात कहकर गया था। धर्मेंद्र की मां चंद्र देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने बेटे के घर पहुंचने के वादे की बात कहते हुए वह बेसुध हो गईं। धर्मेंद्र अपने माता-पिता का इकलौता चिराग था। घटना से अब घर में दुखों का पहाड़ टूट गया है।
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घनश्याम सिंह के परिजनों को सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना की जानकारी मिली तो परिवार के होश ही उड़ गए। यह सुनते ही मां बेहोश हो गई। परिजनों और रिश्तेदारों ने मुश्किल से उसे संभाला। घनश्याम सिंह के दो और भाई हैं। तीनों थलौट में ही किराये के कमरे रहते थे और उनके माता पिता अपने घर में रहते थे। वे खेतीबाड़ी करके अपने तीनों बच्चों को पढ़ा रहे थे।
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ग्राम पंचायत बुंगजहलगाड़ की प्रधान उषा चौहान ने कहा कि घनश्याम का परिवार बेहद गरीब है। बड़ी मुश्किलों के बीच बच्चों की पढ़ाई करवा रहे थे। ऐसे में इस परिवार के घर में दुखों का पहाड़ टूट गया है। वहीं, मुराह पंचायत के उपप्रधान इंद्र सिंह ने बताया कि धर्मेंद्र परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी एक बहन है। बेटे को पढ़ाई के लिए थलौट में भेजा था, लेकिन इस घटना परिवार को झकझोर कर रख दिया है। संवाद
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