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Mandi News: थाची क्षेत्र के आराध्य देव बिठु नारायण का फागली उत्सव शुरू
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थाची के विशेष स्थान से शुरू हुई देवता की वानर सेना की चढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। सिराज विधानसभा क्षेत्र के थाची में आराध्य देवता बिठु नारायण का दस दिवसीय फागली उत्सव शुरू हो गया है। इस हुम उत्सव का आगाज परंपरा और रीति रिवाजों के साथ थाची मैदान में विशेष स्थान से देवता की वानर सेना की चढ़ाई के साथ हुआ। बिठु नारायण को राम का अवतार माना जाता है। इस दौरान राम की सेना ने जब लंका पर आक्रमण किया था, उसी तरफ से यहां एक विशेष माहौल तैयार किया गया।
उत्सव में लोगों को मुखैाटे पहनाए गए, जिसमें मुख्य मुखौट बिठु नरायण का और दूसरा माता नरोल माता का था। फागली में लगभग 80 के करीब मुखौटाधारी (मंढयाहले) ने शिरकत की। यह आयोजन थाची खेल के मैदान से शुरू हुआ और इसके शुभारंभ होने से पूर्व कई रस्मों का निर्वहन किया गया। पहले दिन थाची के बिठु नारायण के मंदिर से वानर सेना चलती है। जबकि दूसरे तीन बढवाडा और तीसरे दिन गिरडा गुराण में दो तीन दिन तक चलती रहती है। बाद में सातवें दिन यह फागली उत्सव गागण में मनाया जाता है, जहां एक बड़े मेले का आयोजन भी किया जाता है। आठवें दिन पूरी वानर सेना विश्राम करती है तो नौवें व अंतिम दसवें दिन थाची में फागली उत्सव का समापन होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। सिराज विधानसभा क्षेत्र के थाची में आराध्य देवता बिठु नारायण का दस दिवसीय फागली उत्सव शुरू हो गया है। इस हुम उत्सव का आगाज परंपरा और रीति रिवाजों के साथ थाची मैदान में विशेष स्थान से देवता की वानर सेना की चढ़ाई के साथ हुआ। बिठु नारायण को राम का अवतार माना जाता है। इस दौरान राम की सेना ने जब लंका पर आक्रमण किया था, उसी तरफ से यहां एक विशेष माहौल तैयार किया गया।
उत्सव में लोगों को मुखैाटे पहनाए गए, जिसमें मुख्य मुखौट बिठु नरायण का और दूसरा माता नरोल माता का था। फागली में लगभग 80 के करीब मुखौटाधारी (मंढयाहले) ने शिरकत की। यह आयोजन थाची खेल के मैदान से शुरू हुआ और इसके शुभारंभ होने से पूर्व कई रस्मों का निर्वहन किया गया। पहले दिन थाची के बिठु नारायण के मंदिर से वानर सेना चलती है। जबकि दूसरे तीन बढवाडा और तीसरे दिन गिरडा गुराण में दो तीन दिन तक चलती रहती है। बाद में सातवें दिन यह फागली उत्सव गागण में मनाया जाता है, जहां एक बड़े मेले का आयोजन भी किया जाता है। आठवें दिन पूरी वानर सेना विश्राम करती है तो नौवें व अंतिम दसवें दिन थाची में फागली उत्सव का समापन होगा।
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