{"_id":"625c539002383c28e73b9f6e","slug":"district-s-first-vegetable-market-will-be-built-in-jarlu-for-natural-farming-products-mandi-news-sml405986961","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए जरलू में बनेगी जिला की पहली सब्जी मंडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए जरलू में बनेगी जिला की पहली सब्जी मंडी
विज्ञापन
मंडी शहर के चौहाटा बाजार में सब्जी बेचने आई ग्रामीण महिलाएं ग्राहकों का इंतजार करती हुईं।
- फोटो : Mandi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंडी। सेहत के लिए फायदेमंद प्राकृतिक खेती का मंडी जिले में प्रचलन बढ़ रहा है। बढ़ती मांग को देखते हुए किसान भी इस खेती को अपनाने लगे हैं। बिना रासायनिक खाद और स्प्रे वाली प्राकृतिक सब्जियों की मुंह मांगी कीमत उपभोक्ता देने के लिए तैयार हैं।
ऐसी सब्जियों की उपलब्धता स्थानीय परचून की सब्जी दुकानों में नहीं हो पाती। लेकिन अब प्राकृतिक खेती से तैयार पैदावार आसानी से मंडियों तक पहुंचेगी। मंडी जिला के बल्ह और सुंदरनगर के साथ सटे जरलू गांव में प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों को बेचने के लिए अब बाजार मिलेगा। यहां किसान प्राकृतिक खेती के उत्पाद बेच सकेंगे। यहां से इन्हें परचून सब्जी विक्रेताओं तक पहुंचाया जाएगा।
33,733 हजार किसान खेती से जुड़े
करीब 33,733 हजार किसान प्राकृतिक की खेती कर रहे हैं। अभी किसानों को अपने स्तर पर उत्पाद बेचने पड़ रहे हैं। इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार से बाजार उपलब्ध करवाने के लिए सब्जी मंडी की मांग उठ रही थी। इसके चलते जरलू में सब्जी मंडी बनाने की तैयारी है।
विज्ञापन
19 बीघा भूमि पर प्राकृतिक खेती की सब्जी मंडी बनेगी। सब्जी मंडी को वन विभाग की मंजूरी (एफसीए) मिल गई है। कृषि उपज एवं विपणन समिति (एपीएमसी) निर्माण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने में जुट गई है। प्रस्तावित सब्जी मंडी स्थल फोरलेन किनारे है। इससे किसानों को सब्जी मंडी पहुंचने में आसानी होगी। एपीएमसी इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए आर्कीटेक्ट नियुक्त करने जा रही है। वह इसका प्रारूप तैयार करेगा। इसके बाद मामला सरकार को भेजा जाएगा।
1489 हेक्टेयर में होती है प्राकृतिक खेती
मंडी जिले में 1489 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जाती है। किसान एक से पांच बीघा भूमि तक गेहूं, गोभी, मटर, फ्रासबीन, ब्रोकली, सोयाबीन, प्याज सहित अन्य सब्जियों का प्राकृतिक खेती तकनीक से उत्पादन कर रहे हैं। कृषि विभाग के सहयोग से किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
क्या कहते हैं किसान
किसानों की आय का आधा हिस्सा उर्वरक और कीटनाशक में ही चला जाता है। यदि किसान खेती में अधिक मुनाफा या फायदा कमाना चाहता है तो उसे प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ना चाहिए। मैंने प्राकृतिक खेती शुरू की है। इसके उत्पाद की बहुत मांग है। मंडी खुलने से फायदा होगा।
सोहन लाल निवासी सलापड़ सुंदरनगर
कई वर्षों से खेती में काफी नुकसान देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कारण हानिकारक कीटनाशकों का उपयोग है। लागत भी बढ़ रही है। रासायनिक खेती से प्रकृति और मनुष्य के स्वास्थ्य में गिरावट आई है। अब प्राकृतिक खेती का प्रचलन बढ़ रहा है।
कर्म सिंह, बल्ह
खेती में खाने-पीने की चीजें काफी उगाई जाती हैं जिसे हम उपयोग में लेते हैं। इन खाद्य पदार्थों में जिंक और आयरन जैसे कई खनिज तत्व होते हैं। ये हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। यही कारण है कि प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ रहा है। मंडी खुलने से बहुत फायदा होगा।
दुर्गा दास, गलमा बल्ह
रासायनिक खाद और कीटनाशक के उपयोग से खाद्य पदार्थ गुणवत्ता खो देते हैं। इससे हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ता है। रासायनिक खाद और कीटनाशक के उपयोग से जमीन की उर्वरक क्षमता खत्म हो रही है। यह भूमि के लिए बहुत ही हानिकारक है। इससे तैयार खाद्य पदार्थ मनुष्य और जानवरों की सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं।
हरि राम निवासी बल्ह
....जानिए प्राकृतिक खेती के बारे में
प्राकृतिक खेती का मुख्य आधार देसी गाय है। प्राकृतिक खेती कृषि की प्राचीन पद्धति है। यह भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखती है। प्राकृतिक खेती में रासायनिक कीटनाशक का उपयोग नहीं किया जाता है। इस प्रकार की खेती में जो तत्व प्रकृति में पाए जाते है, उन्हीं को खेती में कीटनाशक के रूप में काम में लिया जाता है। प्राकृतिक खेती में कीटनाशकों के रूप में गोबर की खाद, कंपोस्ट, जीवाणु खाद, फसल अवशेष और प्रकृति में उपलब्ध खनिज जैसे- रॉक फास्फेट, जिप्सम आदि द्वारा पौधों को पोषक तत्व दिए जाते हैं। प्राकृतिक खेती में प्रकृति में उपलब्ध जीवाणुओं, मित्र कीट और जैविक कीटनाशक से फसल को हानिकारक जीवाणुओं से बचाया जाता है।
विज्ञापन
ऐसी सब्जियों की उपलब्धता स्थानीय परचून की सब्जी दुकानों में नहीं हो पाती। लेकिन अब प्राकृतिक खेती से तैयार पैदावार आसानी से मंडियों तक पहुंचेगी। मंडी जिला के बल्ह और सुंदरनगर के साथ सटे जरलू गांव में प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों को बेचने के लिए अब बाजार मिलेगा। यहां किसान प्राकृतिक खेती के उत्पाद बेच सकेंगे। यहां से इन्हें परचून सब्जी विक्रेताओं तक पहुंचाया जाएगा।
विज्ञापन
33,733 हजार किसान खेती से जुड़े
करीब 33,733 हजार किसान प्राकृतिक की खेती कर रहे हैं। अभी किसानों को अपने स्तर पर उत्पाद बेचने पड़ रहे हैं। इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार से बाजार उपलब्ध करवाने के लिए सब्जी मंडी की मांग उठ रही थी। इसके चलते जरलू में सब्जी मंडी बनाने की तैयारी है।
विज्ञापन
19 बीघा भूमि पर प्राकृतिक खेती की सब्जी मंडी बनेगी। सब्जी मंडी को वन विभाग की मंजूरी (एफसीए) मिल गई है। कृषि उपज एवं विपणन समिति (एपीएमसी) निर्माण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने में जुट गई है। प्रस्तावित सब्जी मंडी स्थल फोरलेन किनारे है। इससे किसानों को सब्जी मंडी पहुंचने में आसानी होगी। एपीएमसी इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए आर्कीटेक्ट नियुक्त करने जा रही है। वह इसका प्रारूप तैयार करेगा। इसके बाद मामला सरकार को भेजा जाएगा।
1489 हेक्टेयर में होती है प्राकृतिक खेती
मंडी जिले में 1489 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती की जाती है। किसान एक से पांच बीघा भूमि तक गेहूं, गोभी, मटर, फ्रासबीन, ब्रोकली, सोयाबीन, प्याज सहित अन्य सब्जियों का प्राकृतिक खेती तकनीक से उत्पादन कर रहे हैं। कृषि विभाग के सहयोग से किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
क्या कहते हैं किसान
किसानों की आय का आधा हिस्सा उर्वरक और कीटनाशक में ही चला जाता है। यदि किसान खेती में अधिक मुनाफा या फायदा कमाना चाहता है तो उसे प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ना चाहिए। मैंने प्राकृतिक खेती शुरू की है। इसके उत्पाद की बहुत मांग है। मंडी खुलने से फायदा होगा।
सोहन लाल निवासी सलापड़ सुंदरनगर
कई वर्षों से खेती में काफी नुकसान देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कारण हानिकारक कीटनाशकों का उपयोग है। लागत भी बढ़ रही है। रासायनिक खेती से प्रकृति और मनुष्य के स्वास्थ्य में गिरावट आई है। अब प्राकृतिक खेती का प्रचलन बढ़ रहा है।
कर्म सिंह, बल्ह
खेती में खाने-पीने की चीजें काफी उगाई जाती हैं जिसे हम उपयोग में लेते हैं। इन खाद्य पदार्थों में जिंक और आयरन जैसे कई खनिज तत्व होते हैं। ये हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। यही कारण है कि प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ रहा है। मंडी खुलने से बहुत फायदा होगा।
दुर्गा दास, गलमा बल्ह
रासायनिक खाद और कीटनाशक के उपयोग से खाद्य पदार्थ गुणवत्ता खो देते हैं। इससे हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ता है। रासायनिक खाद और कीटनाशक के उपयोग से जमीन की उर्वरक क्षमता खत्म हो रही है। यह भूमि के लिए बहुत ही हानिकारक है। इससे तैयार खाद्य पदार्थ मनुष्य और जानवरों की सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं।
हरि राम निवासी बल्ह
....जानिए प्राकृतिक खेती के बारे में
प्राकृतिक खेती का मुख्य आधार देसी गाय है। प्राकृतिक खेती कृषि की प्राचीन पद्धति है। यह भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखती है। प्राकृतिक खेती में रासायनिक कीटनाशक का उपयोग नहीं किया जाता है। इस प्रकार की खेती में जो तत्व प्रकृति में पाए जाते है, उन्हीं को खेती में कीटनाशक के रूप में काम में लिया जाता है। प्राकृतिक खेती में कीटनाशकों के रूप में गोबर की खाद, कंपोस्ट, जीवाणु खाद, फसल अवशेष और प्रकृति में उपलब्ध खनिज जैसे- रॉक फास्फेट, जिप्सम आदि द्वारा पौधों को पोषक तत्व दिए जाते हैं। प्राकृतिक खेती में प्रकृति में उपलब्ध जीवाणुओं, मित्र कीट और जैविक कीटनाशक से फसल को हानिकारक जीवाणुओं से बचाया जाता है।