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Mandi News: आपदा में बेघर लोग फिर बुनने लगे अपने घर का ताना बाना
Thu, 20 Nov 2025 06:23 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 20 Nov 2025 06:23 AM IST
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मंडी। आपदा में घर बहने से बेघर हुए प्रभावित एक बार फिर अपने घर का ताना बाना बुनने लगे हैं। सराज क्षेत्र के बूंग रैलचौक में आपदा के कहर के बाद जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद में प्रभावित जुट गए हैं। क्षेत्र में बर्फबारी से पहले प्रभावितों ने अपना घर बनाने का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। बूंग रैलचौक पंचायत में आपदा प्रभावित धर्मेंद्र ने सबसे पहले अपने घर की पहली मंजिल का कार्य पूरा कर दिया है। अन्य प्रभावित भी युद्धस्तर पर अपना घर बनाने में लगे हुए हैं।
बूंग रैलचौक निवासी धर्मेंद्र ठाकुर ने बताया कि आपदा ने उसके घर के साथ-साथ जमीन को तबाह कर दिया है। अब वहां पर घर बनाने के लिए सुरक्षित जमीन नहीं रही है। अपने सगे भाई से करीब आधा किलोमीटर दूर घर बनाने के लिए जमीन लेनी पड़ी है। भाई प्रकाश के परिवार के साथ उसका परिवार सोलह कमरों के घर में रहता था। आपदा में सब बह गया। अब दो कमरे नीचे व दो ऊपर कुल चार कमरे का घर बनाया जा रहा है। महंगाई के कारण अधिक कमरे बनाना उनके लिए संभव नहीं है। सरकार ने दोनों भाइयों का एक ही केस बना कर पहले फौरी राहत के रूप में 10-10 हजार, पहली किस्त के रूप में 55-55 हजार रुपये बाद में प्रत्येक को 1.35 लाख रुपये की राहत प्रदान की है।
भाई प्रकाश चंद समेत तारा चंद ने भी नए घर का लेंटल डाल दिया। इसके अलावा पूरन चंद, सूरत राम, तारा चंद आदि प्रभावितों ने भी अपने अपने घर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। दूसरों के घर में रहने को मजबूर बूंग गांव की कमला देवी ने भी आपदा में घर समेत गाड़ी को खो दिया है।
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बरसात ने बूंग रैलचौक पंचायत में जो कहर बरपाया है उससे अब स्थानीय लोग उबरने लगे हैं। अधिकतर प्रभावितों ने सुरक्षित स्थान पर घर बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। खेती बाड़ी के लिए भी खेत खलिहान व बाग बगीचों में कार्य शुरू कर दिया है। आपदा से मिले जख्म अब धीरे-धीरे भरने लगे हैं। प्रभावित कड़ी मेहनत के बल पर जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए प्रयासरत हैं।
-भीम सिंह, उपप्रधान, बूंग रैलचौक पंचायत
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बूंग रैलचौक निवासी धर्मेंद्र ठाकुर ने बताया कि आपदा ने उसके घर के साथ-साथ जमीन को तबाह कर दिया है। अब वहां पर घर बनाने के लिए सुरक्षित जमीन नहीं रही है। अपने सगे भाई से करीब आधा किलोमीटर दूर घर बनाने के लिए जमीन लेनी पड़ी है। भाई प्रकाश के परिवार के साथ उसका परिवार सोलह कमरों के घर में रहता था। आपदा में सब बह गया। अब दो कमरे नीचे व दो ऊपर कुल चार कमरे का घर बनाया जा रहा है। महंगाई के कारण अधिक कमरे बनाना उनके लिए संभव नहीं है। सरकार ने दोनों भाइयों का एक ही केस बना कर पहले फौरी राहत के रूप में 10-10 हजार, पहली किस्त के रूप में 55-55 हजार रुपये बाद में प्रत्येक को 1.35 लाख रुपये की राहत प्रदान की है।
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भाई प्रकाश चंद समेत तारा चंद ने भी नए घर का लेंटल डाल दिया। इसके अलावा पूरन चंद, सूरत राम, तारा चंद आदि प्रभावितों ने भी अपने अपने घर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। दूसरों के घर में रहने को मजबूर बूंग गांव की कमला देवी ने भी आपदा में घर समेत गाड़ी को खो दिया है।
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बरसात ने बूंग रैलचौक पंचायत में जो कहर बरपाया है उससे अब स्थानीय लोग उबरने लगे हैं। अधिकतर प्रभावितों ने सुरक्षित स्थान पर घर बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। खेती बाड़ी के लिए भी खेत खलिहान व बाग बगीचों में कार्य शुरू कर दिया है। आपदा से मिले जख्म अब धीरे-धीरे भरने लगे हैं। प्रभावित कड़ी मेहनत के बल पर जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए प्रयासरत हैं।
-भीम सिंह, उपप्रधान, बूंग रैलचौक पंचायत
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