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जोगिंद्रनगर में डायरिया का प्रकोप
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जोगिंद्रनगर अस्पताल में भर्ती डायरिया के मरीज।
- फोटो : Mandi
जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडल में डायरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। महज दो महीने में ही 70 मरीजों को उपचार के लिए दाखिल करना पड़ा। 150 से अधिक मरीजों में उल्टी, दस्त और तेज बुखार के लक्षण पाए गए। इन्हें अस्पताल की ओपीडी में उपचार दिलाकर घर भेजा गया।
महिला, पुरुष और शिशु रोगी वार्ड में करीब दस मरीज अभी भी डायरिया से ग्रसित हैं। उपमंडल के निजी अस्पतालों में भी डायरिया से ग्रस्त मरीजों का उपचार चल रहा है। उपमंडल में दो महीने में उल्टी-दस्त के करीब दस हजार मरीज पाए गए।
नवजात शिशु भी डायरिया की चपेट में आए। डायरिया की रोकथाम के लिए विभागीय टीमों ने घर-घर जाकर लोगों को स्वच्छता के बारे में अवगत करवाया। अस्पताल की मैट्रर्न राम प्यारी ने बताया कि जुलाई और अगस्त में अस्पताल के विभिन्न वार्डों में उपचाराधीन मरीजों को बेहतर उपचार दिलाने के लिए स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाई है।
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मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते सौ बिस्तर वाले अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए बनाए आपातकालीन वार्ड में बेड की कमी खलना शुरू हो गई है। आपातकालीन वार्ड के विस्तार को लेकर मरीजों के तीमारदारों ने स्थानीय प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से जोरदार मांग उठाई है।
एसएमओ डॉ. रोशन लाल कौंडल ने कहा कि उपमंडलीय अस्पताल में जुलाई और अगस्त माह में दाखिल डायरिया के मरीजों को बेहतर उपचार दिलाया गया है। मरीजों को साफ सफाइर्च् के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।
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महिला, पुरुष और शिशु रोगी वार्ड में करीब दस मरीज अभी भी डायरिया से ग्रसित हैं। उपमंडल के निजी अस्पतालों में भी डायरिया से ग्रस्त मरीजों का उपचार चल रहा है। उपमंडल में दो महीने में उल्टी-दस्त के करीब दस हजार मरीज पाए गए।
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नवजात शिशु भी डायरिया की चपेट में आए। डायरिया की रोकथाम के लिए विभागीय टीमों ने घर-घर जाकर लोगों को स्वच्छता के बारे में अवगत करवाया। अस्पताल की मैट्रर्न राम प्यारी ने बताया कि जुलाई और अगस्त में अस्पताल के विभिन्न वार्डों में उपचाराधीन मरीजों को बेहतर उपचार दिलाने के लिए स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाई है।
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मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते सौ बिस्तर वाले अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए बनाए आपातकालीन वार्ड में बेड की कमी खलना शुरू हो गई है। आपातकालीन वार्ड के विस्तार को लेकर मरीजों के तीमारदारों ने स्थानीय प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से जोरदार मांग उठाई है।
एसएमओ डॉ. रोशन लाल कौंडल ने कहा कि उपमंडलीय अस्पताल में जुलाई और अगस्त माह में दाखिल डायरिया के मरीजों को बेहतर उपचार दिलाया गया है। मरीजों को साफ सफाइर्च् के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।