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Mandi News: कलाशन गांव के थल्टू मेले में देव मिलन से माहौल भक्तिमय
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कलाशन गांव में थल्टू मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब। स्त्रोत- जागरूक पाठक
संवाद न्यूज एजेंसी करसोग (मंडी)। सुकेत क्षेत्र की समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं का प्रतीक दो दिवसीय थल्टू मेला कलाशन गांव में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ संपन्न हो गया। ज्येष्ठ मास की 14 और 15 तारीख को आयोजित इस देवोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मेले का मुख्य आकर्षण देव छंडियारा (देव भारती) तथा सुकेत की अधिष्ठात्री महामाया राजराजेश्वरी ललिताम्बिका भुवनेश्वरी देवी का दिव्य मिलन रहा, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। सुकेत संस्कृति साहित्य एवं जनकल्याण मंच, पांगणा-सुकेत के अध्यक्ष डॉ. हिमेंद्र बाली ने बताया कि देव छंडियारा को टौणा देव, देव भारती, कनेरी देव और बाड़ा देव के नामों से भी जाना जाता है।
परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ मास की 14वीं तिथि को देव छंडियारा अपनी कनेरी कोठी से रथ पर विराजमान होकर थल्टू मेला स्थल पहुंचे, जबकि 15वीं तिथि को महामाया राजराजेश्वरी देवी पांगणा से रथारोहण कर मेले में पहुंचीं। दोनों देव विभूतियों के आगमन पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच भव्य देवनृत्य, पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।
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श्रद्धालुओं ने देव दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। संस्कृति मर्मज्ञ डॉ. हिमेंद्र बाली, डॉ. जगदीश शर्मा और भूपेंद्र ठाकुर ने कहा कि थल्टू मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सुकेत की सांस्कृतिक विरासत, लोक आस्था और प्राचीन परंपराओं का जीवंत उत्सव है। यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और नई पीढ़ी तक लोक परंपराओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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मेले का मुख्य आकर्षण देव छंडियारा (देव भारती) तथा सुकेत की अधिष्ठात्री महामाया राजराजेश्वरी ललिताम्बिका भुवनेश्वरी देवी का दिव्य मिलन रहा, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। सुकेत संस्कृति साहित्य एवं जनकल्याण मंच, पांगणा-सुकेत के अध्यक्ष डॉ. हिमेंद्र बाली ने बताया कि देव छंडियारा को टौणा देव, देव भारती, कनेरी देव और बाड़ा देव के नामों से भी जाना जाता है।
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परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ मास की 14वीं तिथि को देव छंडियारा अपनी कनेरी कोठी से रथ पर विराजमान होकर थल्टू मेला स्थल पहुंचे, जबकि 15वीं तिथि को महामाया राजराजेश्वरी देवी पांगणा से रथारोहण कर मेले में पहुंचीं। दोनों देव विभूतियों के आगमन पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच भव्य देवनृत्य, पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।
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श्रद्धालुओं ने देव दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। संस्कृति मर्मज्ञ डॉ. हिमेंद्र बाली, डॉ. जगदीश शर्मा और भूपेंद्र ठाकुर ने कहा कि थल्टू मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सुकेत की सांस्कृतिक विरासत, लोक आस्था और प्राचीन परंपराओं का जीवंत उत्सव है। यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और नई पीढ़ी तक लोक परंपराओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।