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Mandi News: शिव स्वरूप माने जाते है देव माहूंनाग
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मंडी। नाचन विधानसभा क्षेत्र के तरौर गांव में स्थित देव माहूंनाग मंदिर आस्था और लोकविश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। चैलचौक से लगभग चार किलोमीटर और मंडी जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर जबराट की पहाड़ी पर स्थापित यह मंदिर न केवल धार्मिक पहचान है, बल्कि मंडी महाशिवरात्रि महोत्सव में भी रियासत काल से विशेष स्थान रखता है।
देव माहूंनाग को शिव स्वरूप माना जाता है। इसी मान्यता के चलते देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हर वर्ष महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान हजारों श्रद्धालु तरौर मंदिर में शीश नवाने पहुंचते हैं।
मंदिर से जुड़े एक चमत्कार की चर्चा आज भी क्षेत्र में होती है। देव माहूंनाग के गूर डिकपाल के अनुसार लगभग 40 वर्ष पूर्व तमिलनाड़ू में स्थापित कार्तिकेय स्वामी मंदिर की एक मूर्ति में दरार पड़ गई थी। बताया जाता है कि वहां से दो व्यक्ति तरौर पहुंचे और उन्होंने कहा कि कार्तिकेय स्वामी ने स्वप्न में देव माहूंनाग के चरणामृत और विभूति लाने का संकेत दिया है। मंदिर से चरणामृत और विभूति ले जाने के बाद उन्होंने मूर्ति का स्नान करवाया और विभूति का लेप किया। कुछ समय बाद मंदिर समिति को पत्र भेजकर सूचित किया गया कि मूर्ति की दरार भर गई है। क्षेत्र में इसे देव शक्ति का चमत्कार माना जाता है।
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मंदिर का वर्तमान ढांचा लगभग 125 वर्ष पुराना बताया जाता है, जबकि देव स्थल को हजारों वर्ष प्राचीन माना जाता है। गूर के अनुसार उनके दादा को स्वप्न में देव आदेश मिला था कि गांव के समीप खुदाई की जाए। खुदाई में दो प्राचीन चबूतरे मिले। एक चबूतरे पर तीन पत्थर की मूर्तियां स्थापित थीं, जबकि दूसरा खाली था। देव आदेश के अनुसार खाली चबूतरे को हटाकर वहां मंदिर का निर्माण किया गया।
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देव माहूंनाग को शिव स्वरूप माना जाता है। इसी मान्यता के चलते देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हर वर्ष महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान हजारों श्रद्धालु तरौर मंदिर में शीश नवाने पहुंचते हैं।
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मंदिर से जुड़े एक चमत्कार की चर्चा आज भी क्षेत्र में होती है। देव माहूंनाग के गूर डिकपाल के अनुसार लगभग 40 वर्ष पूर्व तमिलनाड़ू में स्थापित कार्तिकेय स्वामी मंदिर की एक मूर्ति में दरार पड़ गई थी। बताया जाता है कि वहां से दो व्यक्ति तरौर पहुंचे और उन्होंने कहा कि कार्तिकेय स्वामी ने स्वप्न में देव माहूंनाग के चरणामृत और विभूति लाने का संकेत दिया है। मंदिर से चरणामृत और विभूति ले जाने के बाद उन्होंने मूर्ति का स्नान करवाया और विभूति का लेप किया। कुछ समय बाद मंदिर समिति को पत्र भेजकर सूचित किया गया कि मूर्ति की दरार भर गई है। क्षेत्र में इसे देव शक्ति का चमत्कार माना जाता है।
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मंदिर का वर्तमान ढांचा लगभग 125 वर्ष पुराना बताया जाता है, जबकि देव स्थल को हजारों वर्ष प्राचीन माना जाता है। गूर के अनुसार उनके दादा को स्वप्न में देव आदेश मिला था कि गांव के समीप खुदाई की जाए। खुदाई में दो प्राचीन चबूतरे मिले। एक चबूतरे पर तीन पत्थर की मूर्तियां स्थापित थीं, जबकि दूसरा खाली था। देव आदेश के अनुसार खाली चबूतरे को हटाकर वहां मंदिर का निर्माण किया गया।
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